EPS 95 न्यूनतम पेंशन 7500 की मांग सरकार के गले की हड्डी, न उगलते बन रहा है-न निगलते, NAC का अब ये दांव

EPS 95 Minimum Pension Preparations for Another Agitation Against the Central Government 1
  • अब बुजुर्ग लोग पिछले 10 सालों से जूझ रहे आंदोलनों के सिवाय कुछ और कर भी क्या सकते हैं?

सूचनाजी न्यूज, रायपुर। कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन 7500 रुपए की मांग देश के लाखों पेंशनभोगी कर रहे हैं। इसको लेकर सरकार पर दबाव डाला जा रहा है, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं दिख रहा। 9 से 11 मार्च तक जंतर-मंतर पर पेंशनभोगी सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने जुटे। बावजूद, सरकार की तरफ से कोई आश्वासन नहीं दिया गया है।

एफसीआइसी से रिटायर्ड पेंशनभोगी अनिल कुमार नामदेव का कहना है कि हजारों लोग न्यूनतम पेंशन के मुद्दे से सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं। किंतु प्रतिक्रिया में उनके मुखरबिंद से दो शब्द नहीं निकाल पाते। पता नहीं सच्चाई से लोग क्यूँ मुँह फेरना चाहते हैं। चापलूसी, अंधविश्वास के सहारे लोग आंदोलन की सही दिशा शायद ही कभी तय करवा सकें।

अब आंदोलन से जुड़े शीर्ष नेतृत्व द्वारा आज 15 मार्च 2026 की शाम को वर्तमान स्थिति की समीक्षा वाली बैठक आहूत करने जा रही है। सुना है सरकार को पुनः 2 अप्रैल तक निर्णय लेने की अपेक्षा की गई है। उसके बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया जाता तो देश भर में उग्र आंदोलन करेंगे। क्या इस बार की तरह करो या मरो का आह्वान दोहराया जाएगा? अब बुजुर्ग लोग पिछले 10 सालों से जूझ रहे आंदोलनों के सिवाय कुछ और कर भी क्या सकते हैं?

सरकार की कालर उनके हाथों से बहुत दूर है। आखिर किसकी कालर जा कर पकड़ अपने लिए न्याय की जीत हासिल हासिल कर सकेंगे…। यही यक्षप्रश्न पहले भी था। आज भी है और आगे भी रहेगा। NAC के मुखिया कमांडर Ashok Rout की कोशिशों पर सवाल उठाना उचित नहीं लगता। वो भी एक सामान्य नागरिक ही हैं और EPS 95 के पेंशनरों को एक जुट कर उनकी एक पहचान बनाई है।

अनिल नामदेव ने कहाञशांतिपूर्ण प्रजातांत्रिक तरीकों से न्यायोचित मांगों को पिछले दस सालों से जनता की लोकप्रिय सरकार के सामने रखते भी आयें हैं। वो भी हमारी तरह किंकर्तव्यविमूढ़ हो चुके होंगे। प्रश्न तो देश की अवाम के सामने है कि सरकार अब निःसहाय बुजुर्ग वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्यों से क्यों विमुक्त हो रही है। क्या इसे ही राम जी का रामराज्य कहा जा सकता है?