- स्टील उद्योग की चुनौतियों को दूर करने के लिए नई तकनीक, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और सौर ऊर्जा का उपयोग करना कितना जरूरी है।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM) के दिल्ली चैप्टर ने इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में IMMS 2026 सम्मेलन का सफल आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय धातुओं को आकार देने वाली “एडवांस्ड रोलिंग टेक्नोलॉजी” पर आधारित था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई। इसके बाद IIM दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष मनोरंजन राम ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि स्टील उद्योग की चुनौतियों को दूर करने के लिए नई तकनीक, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और सौर ऊर्जा का उपयोग करना कितना जरूरी है।
डैनियली इंडिया के CEO गजेंद्र पंवार ने कहा कि उनकी कंपनी भारत में कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और वे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। डिजी के MD नवनीत सिंह ने स्टील बनाने की प्रक्रियाओं में डिजिटल समाधान और नई कोटिंग तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
जिंदल स्टील के वी. आर. शर्मा ने जोर दिया कि भारत को स्टील प्लांटों के लिए अपने खुद के डिजाइन सेंटर बनाने चाहिए और पर्यावरण को बचाने के लिए ‘ग्रीन स्टील’ पर ध्यान देना चाहिए।
उद्घाटन भाषण मुख्य अतिथि डॉ. ए. के. पांडा, निदेशक (वित्त) एवं अतिरिक्त प्रभार निदेशक (वाणिज्य), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ दुनिया और चीन के स्टील बाजार में गिरावट आ रही है, वहीं भारत का स्टील उद्योग लगभग 8 प्रतिशत की अच्छी बढ़त बनाए हुए है।
उन्होंने बताया कि भारत में स्टील बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है-जो अगले तीन-चार सालों में 150 MTPA से बढ़कर 300 MTPA होने का अनुमान है। SAIL समेत सभी बड़ी स्टील कंपनियां विस्तार के बड़े काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि अभी स्टील का उत्पादन घरेलू मांग से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निर्यात में बढ़ोतरी हो रही है।
देश के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के लक्ष्य के साथ चलते हुए, उन्होंने बिजली, रक्षा, ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस के क्षेत्र के लिए अच्छी क्वालिटी वाला स्टील बनाने और विदेशों से आयात कम करने पर जोर दिया।
इसके साथ ही, उन्होंने प्रदूषण कम करने, नई तकनीक अपनाने, सौर ऊर्जा जैसी क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल करने और मशीनों को आधुनिक बनाने के जरिए ‘ग्रीन स्टील’ पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में स्टील इंडस्ट्री में वही आगे रहेगा जो पर्यावरण का ध्यान रखेगा, और अंत में टिकाऊ विकास के लिए SAIL के पक्के इरादे को दोहराया।”
इस मौके पर एक खास स्मारिका (Souvenir) भी जारी की गई। सम्मेलन में भारत और यूरोप के बड़े विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया और स्टील उद्योग के बेहतर भविष्य पर चर्चा की।















