अरुण स्तंभ को ओडिशा के मयूरभंज जिले के खिचिंग से मंगाया गया है। समाजसेवी स्व. दिलीप सतपथी की स्मृति को किया गया चिरस्थायी।
- पुरोहित पंडित तुषार महापात्र द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और संपूर्ण विधि-विधान के साथ अरुण स्तंभ की स्थापना व पूजा-अर्चना की गई।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। उत्कल समाज के प्रतिष्ठित समाजसेवी, शिक्षाविद और महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी के परम भक्त दिवंगत स्व. दिलीप सतपथी की स्मृति में सोमवार को सेक्टर-06 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में भव्य ‘अरुण स्तंभ’ की स्थापना की गई। जगन्नाथ संस्कृति और समाज सेवा के प्रति उनके अद्वितीय समर्पण को जीवंत रखने के लिए उनकी धर्मपत्नी अदिति सतपथी द्वारा इस स्तंभ की स्थापना का संकल्प लिया गया था, जो आज विधि-विधान के साथ पूर्ण हुआ।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठान
इस पावन कार्यक्रम में मुख्य पुरोहित पंडित तुषार महापात्र द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और संपूर्ण विधि-विधान के साथ अरुण स्तंभ की स्थापना व पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इस मांगलिक अनुष्ठान में श्री सीमांचल बेहेरा एवं ज्योत्सना बेहेरा ने मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहकर सभी धार्मिक कार्यों को श्रद्धापूर्वक पूर्ण किया। इस अरुण स्तंभ को ओडिशा के मयूरभंज जिले के खिचिंग से मंगाया गया है। इस अवसर पर जगन्नाथ समाज के गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
क्या है अरुण स्तंभ और इसका महत्व
अरुण स्तंभ का महत्व: मूल रूप से ओड़िशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के सामने स्थापित ‘अरुण स्तंभ’ का जगन्नाथ संस्कृति में अत्यंत उच्च धार्मिक महत्व है। यह 16 कोणों वाला एक भव्य एकश्म स्तंभ है, जिसके शीर्ष पर सूर्य के सारथी ‘अरुण’ विराजमान हैं। मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश करने से पहले इस स्तंभ के दर्शन और स्पर्श से श्रद्धालु के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। सेक्टर-06 जगन्नाथ मंदिर में इसकी प्रतिकृति की स्थापना से स्थानीय श्रद्धालुओं को अब यहीं पुरी धाम की दिव्यता का अनुभव हो सकेगा।
स्व. श्री दिलीप सतपथी का योगदान
स्व. श्री दिलीप सतपथी उत्कल समाज के एक ऐसे प्रकाश स्तंभ थे, जिन्होंने न केवल जगन्नाथ संस्कृति के उन्नयन और प्रचार-प्रसार में अपना जीवन समर्पित किया, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी अद्वितीय मिसाल कायम की। उन्होंने समाज के गरीब और मेधावी बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था करने जैसे कई अनुकरणीय प्रयास किए। उनकी इसी जन-कल्याणकारी सोच और महाप्रभु के प्रति उनकी अगाध आस्था को अक्षुण्ण रखने के लिए उनकी धर्मपत्नी द्वारा यह सराहनीय पहल की गई है।
अदिति सतपथी ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा-महाप्रभु श्री जगन्नाथ के प्रति उनका (स्व. दिलीप जी का) समर्पण अटूट था। यह अरुण स्तंभ न केवल उनकी पावन स्मृति को संजोए रखेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी जगन्नाथ संस्कृति और जनसेवा से जुड़ने की प्रेरणा देगा।”

