जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी 2026: भिलाई टाउनशिप में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम। सेक्टर 6 जामा मस्जिद ईदगाह में नबी की सीरत पर कांफ्रेंस।
- अकीदतमंदों के चेहरों पर खुशी और दिलों में अपने आका ﷺ की मोहब्बत नजर आई।
- पूरे माहौल में नात-ए-पाक, दरूद-ओ-सलाम और “नबी की आमद मरहबा” की सदाएं गूंजती रहीं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत के मौके पर भिलाई शहर में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी की रौनक देखते ही बनी। शहर के मुख्तलिफ इलाकों से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। गलियों और बाजारों में रोशनी की गई और हर तरफ “नबी की आमद मरहबा, आका की आमद मरहबा” की सदाएं बुलंद होती रहीं।
जश्न के दौरान बारगाह-ए-रिसालत में नात-ए-पाक का नजराना पेश किया। जगह-जगह सीरत-ए-मुस्तफा पर कांफ्रेंस और महफिलों का आयोजन हुआ। उलेमा-ए-दीन ने अपने बयानों में पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की मुबारक जिंदगी, अखलाक, इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे और अमन के पैगाम को आम करने की अपील की। हदीस-ए-पाक और सीरत-ए-रसूल ﷺ के हवाले से भी लोगों को नेक जिंदगी गुजारने का पैगाम दिया गया।

भिलाई में दोपहर बाद से ही बारावफात की रौनक नजर आने लगी। कैंप, खुर्सीपार, पावर हाउस और सेक्टर इलाकों में जश्न का माहौल रहा। कैंप क्षेत्र से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, जिसमें अलग-अलग इलाकों से आए आशिकान-ए-रसूल शामिल होते गए। सेक्टर-6 जामा मस्जिद से निकला जुलूस भी इसमें शामिल हो गया।

जुलूस पावर हाउस, सेक्टर-1 होते हुए रात करीब 8 बजे तक सेक्टर-6 जामा मस्जिद पहुंचा। इसके बाद ईदगाह मैदान में आयोजित सीरत कांफ्रेंस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शरीक हुए। मैदान में हजारों लोगों की मौजूदगी रही। महिलाओं के लिए भी अलग से इंतजाम किया गया था।

लंगर और सबीलों से गुलजार रहे रास्ते
जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मस्जिद के बाहर और जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लंगर और सबील का इंतजाम किया गया। कहीं बिरयानी और कोरमा-कबाब का लंगर था तो कहीं वेज व्यंजनों से लोगों की खिदमत की जा रही थी। बच्चों और राहगीरों के लिए आइसक्रीम भी बांटी गई। पानी और शरबत की सबीलों पर लोगों की खिदमत का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के चेहरों पर खुशी और दिलों में अपने आका ﷺ की मोहब्बत नजर आई। परिवारों के साथ बड़ी संख्या में लोग जश्न में शरीक हुए। पूरे माहौल में नात-ए-पाक, दरूद-ओ-सलाम और “नबी की आमद मरहबा” की सदाएं गूंजती रहीं।
ईद मिलादुन्नबी का यह जश्न महज खुशी का इजहार नहीं, बल्कि सीरत-ए-पाक को अपनी जिंदगी में उतारने और नबी-ए-करीम के बताए रास्ते पर चलने के पैगाम के साथ संपन्न हुआ।

