नए लेबर कोड में कानून बनाने के साथ-साथ एक प्रभावी सिस्टम हो, जो दोषियों पर कार्रवाई करे, तभी यह कोड सार्थक होगा।
- जब तक कानून के क्रियान्वयन के लिए प्रभावी सिस्टम नहीं होगा, तब तक कानून का कोई औचित्य नहीं है और शोषण जारी रहेगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। श्रम संहिताओं की जानकारी देने पहुंचे केंद्रीय अधिकारियों के सामने तीखे सवालों का दौर चला। कार्यक्रम में सबसे पहले सांसद विजय बघेल ने अपने उद्बोधन में हायर पेंशन को लेकर आ रही दिक्कतों को अधिकारियों के सामने रखा और मिलकर समाधान निकालने की बात कही। लेकिन ईपीएफओ से आए अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए साफ कहा कि यह हमारे हाथ में नहीं है। ट्रस्ट बोर्ड और नियम-कायदों का हवाला देकर उन्होंने असमर्थता जता दी। सांसद ने सेक्टर 9 हॉस्पिटल, बकाया 39 माह के एरियर, मजदूरों की छंटनी, 52 हजार से घटकर 12 हजार मजदूरों की संख्या, टाउनशिप के बंद होते स्कूल आदि पर मायूसी जाहिर की। तंज कसते हुए कहा-सेल कारपोरेट आफिस के अधिकारी कब आते हैं और चले जाते हैं, पता ही नहीं चलता…।
नाश्ते पर भी हंगामा
टी-ब्रेक के दौरान कई कर्मचारियों को नाश्ता नहीं मिलने की शिकायत सामने आई। चर्चा का विषय रहा कि एनजेसीएस सदस्य और जेसीसीआईसी मेंबर विनोद सोनी सहित कई अन्य सदस्यों को नाश्ता नहीं मिला। व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए।
सवाल-जवाब सत्र में हंगामा
नाश्ते के बाद सवाल-जवाब सत्र शुरू हुआ। सबसे पहले दिनेश पांडे ने वेतन संहिता और आईआर संहिता पर विरोध जताते हुए कहा कि हम इनका विरोध करते हैं, बाकी श्रम कानूनों का समर्थन करते हैं। उसके बाद सवाल-जवाब का सिलसिला चलता रहा, लेकिन आधे घंटे बाद ही प्रबंधन द्वारा सत्र समाप्त करने की बात कहे जाने पर यूनियन पदाधिकारियों ने हो-हल्ला शुरू कर दिया और कई सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे।
सीटू ने उठाए अहम सवाल
सीटू के उपाध्यक्ष देवेंद्र सुंदर ने 300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को ‘एस्टेब्लिशमेंट’ के दायरे से बाहर रखने के प्रावधान पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि “कभी भी बंद करो, कभी भी चालू करो” जैसी स्थिति बनेगी। इसका सीधा जवाब अधिकारियों से नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इससे 74% मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। इस पर प्रबंधन की ओर से जवाब आया कि अपॉइंटमेंट लेटर देने के बाद स्थितियां बदलेंगी और हम ज्वाइनिंग लेटर तो दे पा रहे हैं।
जयप्रकाश नारायण ने कहा, “महोदय, आपने जितनी जानकारियां दी हैं, अगर हम उन जानकारियों को कैंटीन में जाकर ठेका मजदूरों के बीच शेयर करते हैं, उन्हें शिक्षित करते हैं, तो क्या आप यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रबंधन हमें चिट्ठियां नहीं देगा या धमकाएगा नहीं? क्योंकि इससे पहले इसी तरह की जानकारी मजदूरों के बीच रखने पर मुझे मजदूरों को भड़काने-बरगलाने के आरोप में शो-कॉज नोटिस मिला है।”
सीटू से जोगाराव ने फ्लोर वेज और मिनिमम वेज की व्याख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि रोटी-कपड़ा-मकान के आधार पर वेतन निर्धारण की जो व्याख्या 70 साल पहले की गई थी, क्या आज के पढ़े-लिखे युवाओं पर भी वही मापदंड लागू किया जा सकता है? आज के युवाओं की जरूरतें अलग हैं। इसकी व्याख्या बदली जानी चाहिए और उसी के अनुसार न्यूनतम वेतन और फ्लोर वेज निर्धारित किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि न्यूनतम वेज और फ्लोर वेज जल्द ही निर्धारित किया जाएगा।
उन्होंने व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को इंस्पेक्टर के साथ-साथ फैसिलिटेटर बनाए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि कानून 70 साल पहले भी था और आज भी है, केवल कानून बना देने से न्याय नहीं मिल जाता। आज स्थिति बहुत विपरीत है। यदि नियोक्ता और ठेकेदारों पर कानून का प्रभावी क्रियान्वयन और कार्रवाई नहीं होगी, तो ऐसे कार्यक्रम सिर्फ एक इवेंट बनकर रह जाएंगे।
कुल मिलाकर पूरे कार्यक्रम में यूनियन लीडरों की यही राय रही कि जब तक कानून के क्रियान्वयन के लिए प्रभावी सिस्टम नहीं होगा, तब तक कानून का कोई औचित्य नहीं है और शोषण जारी रहेगा। इसलिए नए लेबर कोड में कानून बनाने के साथ-साथ एक प्रभावी सिस्टम हो, जो दोषियों पर कार्रवाई करे, तभी यह कोड सार्थक होगा।
ये अधिकारी रहे मौजूद
निदेशक (श्रम सुधार), श्रम एवं रोजगार मंत्रालय डॉ. पी. के. जेना, अवर सचिव, एलआरसी संजय कुमार तिवारी, श्रम कल्याण आयुक्त (मुख्यालय), पीएमयू-एलआरसी ओपी सिंह, उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) बीसी नायक, क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय) अखिलेश राय, सहायक श्रम आयुक्त (केंद्रीय) पीके दीक्षित, आरपीएफसी-II, ईपीएफओ गौरव डोगरा, उप निदेशक, ईएसआईसी रत्नेश राजन्या, उप निदेशक, ईएसआईसी एनके धीरेन्द्र पटनायक, उप निदेशक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, छत्तीसगढ़ शासन मनीष कुंजाम, कार्यपालक निदेशक (रावघाट) अरुण कुमार उपस्थित रहे। महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन) संजय द्विवेदी ने स्वागत उद्बोधन दिया।








