केंद्र सरकार की एपेक्स कमेटी ने दोनों कंपनियों के महारत्न दर्जे की समीक्षा करते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए नोटिस पर रखने का फैसला किया है।
- इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय को SAIL एवं BHEL की कम लाभप्रदता और वित्तीय प्रदर्शन सुधारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली/भिलाई। देश की दो बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों Steel Authority of India Limited (SAIL) और Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की एपेक्स कमेटी ने दोनों कंपनियों के महारत्न दर्जे की समीक्षा करते हुए उन्हें एक वर्ष के लिए नोटिस पर रखने का फैसला किया है। यदि अगले एक साल में वित्तीय प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो महारत्न दर्जा वापस लेकर नवरत्न श्रेणी में डाउनग्रेड करने पर भी विचार किया जा सकता है।
एपेक्स कमेटी की बैठक में दो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को नवरत्न (Navratna) का दर्जा देने की सिफारिश की गई है। Chennai Petroleum Corporation Limited (CPCL) और Garden Reach Shipbuilders & Engineers Limited (GRSE) के लिए अच्छी खबर आई। बैठक में दोनों कंपनियों के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन की समीक्षा के बाद नवरत्न दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। CPCL ने वित्तीय मानकों पर 80 अंक प्राप्त किए, जबकि GRSE ने 76 अंक हासिल किए और दोनों कंपनियां निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करती पाई गईं।
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एपेक्स कमेटी की बैठक में महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि 14 महारत्न कंपनियों में से 12 निर्धारित मानकों पर खरी उतरीं, लेकिन SAIL और BHEL पिछले तीन वर्षों के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ (PAT) 5,000 करोड़ रुपये से अधिक रखने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर सकीं।
SAIL पर क्या कहा गया
बैठक में बताया गया कि SAIL देश और दुनिया की प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनियों में शामिल है। पिछले चार वर्षों में कंपनी का औसत वार्षिक टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है तथा औसत नेटवर्थ 53,976 करोड़ रुपये है। कंपनी ने 16 संयुक्त उपक्रम (JV) बनाए हैं, जिनमें 8 संचालित हैं और 2 लाभ में हैं। वर्ष 2024-25 में इन संयुक्त उपक्रमों में कुल 1,463 करोड़ रुपये का निवेश हुआ तथा 220 करोड़ रुपये का लाभांश प्राप्त हुआ।
हालांकि, स्टील क्षेत्र में डंपिंग, कच्चे माल के आयात पर निर्भरता और कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों का असर कंपनी के मुनाफे पर पड़ा है। वर्ष 2025-26 में SAIL का PAT बढ़कर 3,233 करोड़ रुपये पहुंचा, जो 2024-25 में 2,148 करोड़ रुपये था, लेकिन यह अभी भी महारत्न मानदंड के लिए आवश्यक औसत 5,000 करोड़ रुपये से काफी कम है।
BHEL की स्थिति भी समान
BHEL के मामले में भी समिति ने पाया कि कंपनी का प्रदर्शन सुधरा है। वर्ष 2024-25 में 513 करोड़ रुपये के मुकाबले 2025-26 में उसका अनुमानित PAT 1,943 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बैठक में बताया गया कि कंपनी में मानव संसाधन नीतियों और परिचालन सुधारों पर काम किया जा रहा है तथा लाभ बढ़ाने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई है।
एक साल बाद फिर होगी समीक्षा
लंबी चर्चा के बाद एपेक्स कमेटी ने फैसला किया कि SAIL और BHEL को तीन वर्ष नहीं बल्कि केवल एक वर्ष के लिए नोटिस पर रखा जाए। एक साल बाद दोनों कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन की फिर समीक्षा होगी। यदि सुधार नहीं दिखा तो महारत्न दर्जा समाप्त कर उन्हें नवरत्न श्रेणी में लाने पर विचार किया जाएगा। साथ ही इस्पात मंत्रालय और भारी उद्योग मंत्रालय को SAIL एवं BHEL की कम लाभप्रदता और वित्तीय प्रदर्शन सुधारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला SAIL और BHEL दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि महारत्न का दर्जा कंपनियों को निवेश और व्यावसायिक निर्णयों में अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करता है। यदि यह दर्जा प्रभावित होता है तो दोनों कंपनियों की निर्णय लेने की स्वतंत्रता और निवेश क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

