भ्रामक समाचार फैलाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। यह वृद्ध पेंशनर्स की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा अक्षम्य कृत्य है।
- पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर एक तथाकथित “कार्यालय आदेश” तेजी से वायरल किया गया।
- भिलाई के एक छुटभैय्या नेता ने कुछ वाट्सएप ग्रुपों में शेयर किया। एक अखबार ने भी फर्जी खबर को प्रकाशित किया।
सूचनाजी न्यूज, रायपुर। ईपीएस 95 न्यूनतम पेंशन को लेकर फर्जी खबरों ने पेंशनभोगियों के साथ भद्दा मज़ाक कर दिया है। न्यूनतम पेंशन 7500 रुपए किए जाने की फर्जी खबर से पेंशनर्स गुस्से में हैं। ईपीएस 95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति भी झूठी खबरों को लेकर भड़क गया है। समिति ने प्रेस रिलीज जारी कर पेंशनभोगियों से अपील किया है कि भ्रामक समाचारों से सावधान रहें।
पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया पर एक तथाकथित “कार्यालय आदेश” तेजी से वायरल किया जा रहा है, जिसमें ईपीएस-95 के न्यूनतम पेंशन में वृद्धि किए जाने का दावा किया गया है। भिलाई स्टील प्लांट के एक छुटभैय्या नेता ने वाट्सएप ग्रुपों में शेयर किया था। समिति के छत्तीसगढ़ एलएम सिद्दीकी का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसा कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। कुछ शरारती तत्वों द्वारा सरकारी आदेश का स्वरूप देकर भ्रामक जानकारी फैलाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। यह वृद्ध पेंशनर्स की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा अक्षम्य कृत्य है।
बसौराज की अध्यक्षता वाली श्रम, कपड़ा एवं कौशल विकास की संसदीय समिति ने 17 अप्रैल 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। समिति ने अपनी अनुशंसाओं में कहा है कि ईपीएस-95 योजना के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन में तत्काल प्रभाव से पर्याप्त वृद्धि की जानी चाहिए, क्योंकि वर्तमान में निर्धारित 1000 रुपये प्रतिमाह की राशि किसी भी परिवार के सम्मानजनक जीवन-यापन हेतु नितांत अपर्याप्त है।
हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। फिर भी यह सकारात्मक तथ्य है कि पेंशन वृद्धि के प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत एवं महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत इस विषय पर निरंतर प्रयासरत हैं तथा पेंशनर्स के हितों की रक्षा हेतु लगातार सरकार एवं संबंधित विभागों के समक्ष प्रभावी पैरवी कर रहे हैं।
ईपीएस-95 पेंशनर्स से अपील की जाती है कि वे किसी भी अपुष्ट अथवा भ्रामक समाचार पर विश्वास न करें तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।








