- भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों ने मांग की है कि बढ़ा हुआ डीए तत्काल प्रभाव से दिया जाए और भविष्य में इस तरह की देरी न हो।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के कर्मचारियों में भारी असंतोष और निराशा का माहौल है। जनवरी 2026 में कर्मचारियों को मिलने वाला बढ़ा हुआ 1.6 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) अब तक नहीं दिया गया, जिससे कर्मियों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकारी विभाग से आदेश की कॉपी सेल कारपोरेट आफिस को प्राप्त नहीं हुई है। इस वजह से सभी प्लांट के कर्मचारियों और अधिकारियों को जनवरी की सैलरी के साथ बढ़े डीए का लाभ नहीं मिल सका है। सर्कुलर आने के बाद सैलरी के साथ एरियर दिया जाएगा। डीए का एरियर और फाइनल पेमेंट का एरियर एक साथ दिया जाएगा।
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान कर्मचारियों को 51.8 प्रतिशत डीए का भुगतान किया जा रहा था। नियमानुसार जनवरी 2026 से डीए में 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी थी और यह 53.3 प्रतिशत तक पहुंच जाना चाहिए था, लेकिन जनवरी माह बीत जाने के बावजूद बढ़ा हुआ डीए कर्मचारियों को नहीं मिला।
कर्मचारियों के साथ फिर दोहराया गया पुराना अनुभव
यह पहला मौका नहीं है जब डीए भुगतान में देरी हुई हो। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले वर्ष भी सरकारी विभाग द्वारा डीए इंडेक्स में सुधार करने में तीन महीने की देरी की गई थी, जिसके कारण अप्रैल, मई और जून का डीए बाद में भुगतान किया गया। उस समय भी कर्मचारियों को कई महीनों तक बढ़े हुए डीए का इंतजार करना पड़ा था।
हर महीने जेब पर सीधा असर
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, डीए न मिलने से हजारों कर्मचारियों की मासिक आय प्रभावित हो रही है। महंगाई के इस दौर में 1.6 प्रतिशत डीए का भुगतान न होना कर्मचारियों के लिए केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि घर का बजट बिगाड़ने वाला फैसला है। इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति घट रही है और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
प्रबंधन और सरकार से जवाब की मांग
कर्मचारियों में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जब डीए इंडेक्स तय है, तो भुगतान में बार-बार देरी क्यों की जा रही है। कर्मियों का आरोप है कि यह प्रबंधन और सरकारी तंत्र की उदासीनता का परिणाम है, जिसका खामियाजा हर बार कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।
भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों ने मांग की है कि बढ़ा हुआ डीए तत्काल प्रभाव से दिया जाए और भविष्य में इस तरह की देरी की पुनरावृत्ति न हो, ताकि कर्मियों को बार-बार आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।











