बीएसपी संयुक्त ट्रेड यूनियन बोला-प्रबंधन बताए-क्या अब बोझ बन गया सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनके जीवनसाथी का मुफ्त इलाज?
- संयुक्त ट्रेड यूनियन बोला-यदि समय रहते स्थाई एवं सेवानिवृत्त कर्मी, उनके परिवार और आम नागरिक एकजुट नहीं हुए तो स्वास्थ्य संस्था को बचाना कठिन हो जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर 9 हॉस्पिटल के निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोला गया है। बीएसपी संयुक्त ट्रेड यूनियन की टीम सेक्टर 9 अस्पताल में ओपीडी एवं कैंटीन का दौरा कर इलाज कराने आए मरीजों एवं उनके परिजनों को पर्चा वितरित करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र का सेक्टर-9 अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि वर्तमान एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिजनों की जीवनरेखा है।
आज जिस तरह अस्पताल की सुविधाओं में लगातार कटौती की जा रही है, उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रबंधन अब सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं उनके स्पाउस के मुफ्त इलाज को अपने ऊपर बोझ मानने लगा है? जिन्होंने दशकों तक संयंत्र के निर्माण और विकास में अपना जीवन लगाया, उनके स्वास्थ्य अधिकारों की अनदेखी किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती।
हेल्थ सेंटरों की बदहाली के लिए कौन है जिम्मेदार
एक समय था जब भिलाई के सभी हेल्थ सेंटरों में सामान्य बीमारियों का प्रभावी उपचार उपलब्ध था। आज स्थिति यह है कि सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी सामान्य बीमारी के लिए भी मरीजों को सेक्टर-9 अस्पताल जाना पड़ता है। इससे अस्पताल पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है और मरीजों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। यदि हेल्थ सेंटरों को पहले की तरह सशक्त बनाकर रखा गया होता और वहां पर्याप्त दवाइयों एवं चिकित्सकों की व्यवस्था होती, तो मरीजों को राहत मिलती तथा सेक्टर 9 अस्पताल पर भार भी कम होता ।
पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति ही समाधान
अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि पर्याप्त चिकित्सकों, नर्सों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों की कमी है। यदि आवश्यक संख्या में स्टाफ की नियुक्ति कर दी जाए तो सेक्टर-9 अस्पताल आज भी अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल कर सकता है। यह अस्पताल चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अनुभव के आधार पर फिर से छत्तीसगढ़ का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल बनने की पूरी क्षमता रखता है।
आधुनिक उपकरण आज भी सेक्टर-9 अस्पताल की सबसे बड़ी ताकत
यह एक सच्चाई है कि आज भी सेक्टर-9 अस्पताल में उपलब्ध अनेक आधुनिक चिकित्सा उपकरण छत्तीसगढ़ के कई बड़े निजी एवं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग तभी संभव है जब पर्याप्त विशेषज्ञ और तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध हों। इसलिए समाधान अस्पताल को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे और अधिक मजबूत बनाना है।
अस्पताल बचाना जनता और कर्मचारियों की साझा जिम्मेदारी
सेक्टर-9 अस्पताल को कमजोर करने या निजीकरण की दिशा में बढ़ाने के बजाय उसे सशक्त बनाने की आवश्यकता है। यह केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि पूरे भिलाई क्षेत्र के सामाजिक सरोकार का विषय है। अस्पताल पर किया गया खर्च कोई बोझ नहीं, बल्कि उन श्रमिकों के प्रति सम्मान है जिन्होंने देश के औद्योगिक विकास में अपना योगदान दिया है।
संघर्ष ही अस्पताल बचाने का एकमात्र रास्ता
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने कहा कि यदि समय रहते स्थाई एवं सेवानिवृत्त कर्मी, उनके परिवार और आम नागरिक एकजुट होकर संघर्ष नहीं करेंगे तो इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था को बचाना कठिन हो जाएगा। इसलिए सभी से आह्वान है कि सेक्टर-9 अस्पताल को मजबूत बनाने और उसके सार्वजनिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए चल रहे आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यही अस्पताल, कर्मचारियों और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य हितों की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

