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जंतर-मंतर पर छात्र-छात्राओं पर टूटी लाठी, दर्द भिलाई को भी

Azmat ali 21/07/2026 1 minute read
Students Faced a Lathi-Charge at Jantar Mantar Protest Continues in Bhilai

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से हटाया जाए अथवा उनका तत्काल इस्तीफा की मांग।

  • हम भारत के लोग की एकजुट हुंकार: शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ का नारा भिलाई में भी गूंजा।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। “हम भारत के लोग” के बैनर तले सुपेला घड़ी चौक में नीट पेपर लीक, सीबीएसई उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन में हुई गंभीर अनियमितताओं, नई शिक्षा नीति–2020 तथा राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरदस्ती उठाकर केंद्र सरकार विरोध की आवाज को दबा नहीं सकती। विभिन्न राजनीतिक दलों, जन संगठनों, सामाजिक संगठनों, छात्र-युवा संगठनों एवं आम नागरिकों ने अपनी-अपनी संगठनात्मक पहचान से ऊपर उठकर संविधान की प्रस्तावना की पहली पंक्ति “हम भारत के लोग” की भावना के साथ एकजुट होकर केंद्र सरकार की जनविरोधी शिक्षा नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।

दिल्ली नहीं जा सके, लेकिन खड़े हैं संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे संसद मार्च में भाग लेने के लिए दिल्ली नहीं पहुंच सके, लेकिन उनका मन, विचार और संघर्ष पूरी तरह उस आंदोलन के साथ है। दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा गया कि यह लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, संविधान और युवाओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई है। इस संघर्ष को देशव्यापी जन आंदोलन बनाने का संकल्प भी लिया गया।

युवाओं का भविष्य बर्बाद किया पेपर लीक और परीक्षा घोटालों ने

क्ताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक और सीबीएसई पेपर जांच में सामने आई अनियमितताओं ने लाखों मेहनतकश विद्यार्थियों के सपनों को तोड़ दिया है। वर्षों की मेहनत करने वाले छात्र अन्याय के शिकार हुए हैं, जबकि भ्रष्ट तंत्र के संरक्षण में नकल और पेपर लीक का कारोबार फल-फूल रहा है। कई विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने के बावजूद केंद्र सरकार की संवेदनहीनता और चुप्पी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। दोषियों को बचाने और छात्रों को न्याय से वंचित रखने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें

प्रदर्शन में यह मांग भी प्रमुखता से उठाई गई कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और मूल्यांकन संबंधी गंभीर अनियमितताओं की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। वक्ताओं ने कहा कि जब देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार प्रश्नचिह्न लग रहे हैं और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है, तब केवल औपचारिक बयान पर्याप्त नहीं हैं। जवाबदेही तय होना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मूल शर्त है। इसलिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच समय की मांग है।

नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली वापस लो

प्रदर्शन में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई कि छात्रों पर जबरन थोपी जा रही नई शिक्षा नीति–2020 तथा राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को तत्काल रद्द किया जाए। यह नीति शिक्षा में समान अवसर समाप्त कर निजीकरण, केंद्रीकरण और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देती है। देश की विविध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नई परीक्षा व्यवस्था विकसित की जाए जो पारदर्शी, निष्पक्ष, वैज्ञानिक और सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने वाली हो।

सोनम वांगचुक को जबरदस्ती उठाकर दबा नहीं सकते लोकतांत्रिक आवाज़ों को

प्रदर्शनकारियों ने वैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा धरना स्थल से जबरन हटाए जाने और लोकतांत्रिक आंदोलनों पर दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि जनता की आवाज़ को पुलिस बल के सहारे दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है। केंद्र सरकार की निरंकुश और तानाशाही कार्यशैली अब देश की जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुकी है। असहमति को अपराध मानने वाली मानसिकता लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

क्या घोटाला करके बने डॉक्टर से इलाज कराएंगे केंद्र में बैठे मंत्री एवं अधिकारी

सभा में उपस्थित लोगों ने सरकार से सवाल किया कि यदि पेपर लीक और धांधली के माध्यम से मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले छात्र डॉक्टर बनेंगे, तो क्या सरकार में बैठे मंत्री और उच्च अधिकारी ऐसे डॉक्टरों से अपना और अपने परिवार का इलाज कराएंगे? यदि नहीं, तो देश के आम नागरिकों के जीवन के साथ यह खिलवाड़ क्यों?

जनता का स्पष्ट संदेश- बंद करो देश के साथ खिलवाड़ करना

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि नीट पेपर लीक, सीबीएसई मूल्यांकन अनियमितताओं की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, दोषियों को कठोर दंड दिया जाए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से हटाया जाए अथवा उनका तत्काल इस्तीफा लिया जाए, नई शिक्षा नीति–2020 और वर्तमान राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को तत्काल वापस लिया जाए तथा शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और संविधान की समानता की भावना के अनुरूप बनाया जाए। यदि सरकार ने इन मांगों की अनदेखी की, तो देशभर में व्यापक जन आंदोलन तेज किया जाएगा।

सभी समझ रहे हैं कि सरकार को अपनी चिंता है सोनम वांगचुक की नहीं

सोनम वांगचुक की सेहत का हवाला देकर उन्हें जंतर-मंतर से सफेद चादरों के बीच ढंककर अस्पताल ले जाने का तरीका कई सवाल खड़े करता है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि चिंता उनकी सेहत से अधिक सरकार की राजनीतिक छवि को लेकर थी। औपनिवेशिक दौर में भी कई बार संवाद की गुंजाइश रहती थी, लेकिन इस कार्रवाई ने संवाद के बजाय कठोर और तानाशाही रवैये का संदेश दिया।

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