सूचनाजी न्यूज, भिलाई। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड-एफएसएनएल (Ferro Scrap Nigam Limited- FSNL) को जापानी कंपनी कोनोइके ग्रुप ने पिछले साल खरीदा था। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मार्च 2026 तक पूरे काम समेटने की मोहलत दी थी। अब ग्लोबल टेंडर में जापानी कंपनी पिछड़ गई है। नया काम श्री लाखोटिया ग्रुप यानी Shree International Vyapar Private Limited (SIVPL) को मिल गया है।
सेल भिलाई स्टील प्लांट के एसएमएस में कोनोइके ग्रुप आगे काम नहीं करेगी। इस्पात मंत्रालय के अधीन आने वाली एफएसएनएल बिकने के बाद कर्मचारियों की नौकरी पर कोई संकट नहीं था। अब काम न होने के डर से कंपनी के भविष्य की चिंता जाहिर की जा रही है। कर्मचारी-अधिकारी भी तनाव में आ गए हैं। कोनोइके ग्रुप के अधिकारियों का कहना है कि पहले ही हम लोग प्राइवेट हो चुके हैं। अब प्राइवेट कंपनी में जॉब तलाशना होगा, ताकि परिवार चल सके।
भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एक मिनी रत्न-II कंपनी एफएसएनएल को जनवरी 2025 में जापान की कोनोइके ग्रुप जापान ने खरीद लिया। छत्तीसगढ़ के भिलाई में मुख्यालय है। सेल (SAIL), आरआईएनएल (RINL), और अन्य इस्पात संयंत्रों में स्क्रैप को पुनर्चक्रित (Recycle) करने और “वेस्ट से वेल्थ” (Wealth from Waste) बनाने का काम कोनोइके ग्रुप करती है।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल ने पहले से तय शर्तों के मुताबिक ग्लोबल टेंडर निकाला। 393 करोड़ इस्टीमेट वैल्यू से 43 प्रतिशत बिलो रेट पर श्री लाखोटिया ग्रुप ने जॉब ले लिया। कोनोइके ग्रुप ने 227 करोड़ की बोली लगाई, लाखोटिया ने 225 करोड़ की बोली लगाकर काम ले लिया है। मार्च 2026 तक काम को समेटना है। बताया जा रहा है कि सेल की मजबूरी है कि ग्लोबल टेंडर निकालना पड़ा। एल-1 में सबसे कम रेट पर काम लाखोटिया ग्रुप को दिया गया है।
कोनोइके ग्रुप इस्पात मिलों में स्क्रैप रिकवरी, स्क्रैप प्रोसेसिंग और मैटेरियल हैंडलिंग के काम में माहिर है। सेल (SAIL) के विभिन्न संयंत्रों (भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर आदि) और RINL, MIDHANI में काम करती है।
एफएसएनएल प्रबंधन का ये पक्ष
एफएसएनएल कोनोइके ग्रुप के जीएम प्रोजेक्ट एंड बिजनेस डेवलपमेंट बीपी अनंत ने खबर पर मुहर लगाई। जीएम के मुताबिक बीएसपी में एक एग्रीमेंट था। इसको चार हिस्सों में बांटकर ग्लोबल टेंडर सेल प्रबंधन की ओर से निकाला गया। एसएमएस के 393 करोड़ के इस्टीमेटेड वैल्यू पर बिलो रेट देने वाली कंपनी Shree International Vyapar Private Limited (SIVPL) को ठेका दिया गया है। यह तो सेल प्रबंधन का फैसला है। इस बारे में हम लोग कुछ नहीं बाेल सकते।











