- अस्पताल एवं फायर सर्विसेज के कर्मियों को सीटू कभी भी हड़ताल करने की इजाजत नहीं देता है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र सरकार के द्वारा 29 श्रम कानून को खत्म करके जिन चार श्रम कोड को संसद में पारित करवाया गया था, उन श्रम कोड्स को अधिसूचित करने के बाद उसके नियम को भी अधिसूचित कर दिया गया है। इसे लागू करने की तैयारी चल रही है।
इसके खिलाफ पूरे देश में मजदूर हड़ताल कर रहे है, उनके समर्थन में भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ, टेक्निशियन, फार्मासिस्ट एवं अटेंडेंट पटना के सात शहीदों के छत्रछाया में एकजुटता जाहिर किया। कैजुअल्टी के सामने खड़े होकर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
लेबर कोड के विरोध में अस्पताल के कर्मियों ने काला फीता लगाकर किया काम
लेबर कोड के विरोध में जहाँ एक तरफ पूरे देश में मजदूर हड़ताल कर रहे है। वहीं, भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के कर्मियों ने काला फीता लगाकर काम किया। सीटू के अस्पताल जोन के साथी दो दिन पहले से अभियान चलाते हुए सभी कर्मियों तक काला फीता पहुंचाने के साथ-साथ हड़ताल के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा किए थे।
अस्पताल एवं फायर सर्विस के कर्मियों को हड़ताल करने की इजाजत नहीं देता है
सीटू नेता टी जोगा राव ने कहा कि अस्पताल एवं फायर सर्विसेज के कर्मियों को सीटू कभी भी हड़ताल करने की इजाजत नहीं देता है, क्योंकि ये दोनों आवश्यक सेवाओं में आते हैं। जो सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़े हुए हैं। इनका काम लोगों का जीवन बचाना होता है।
सीटू अच्छे से समझता है कि इंसान की जिंदगी एवं कारखाने के मशीन दोनों एक नहीं है, क्योंकि मशीन एक दिन बंद होता है तो दूसरे दिन चालू किया जा सकता है। किंतु इंसान की जिंदगी एक बार बंद हो गई तो दोबारा चालू नहीं किया जा सकता है।
अस्पताल में चालू हो चुका है फिक्स्ड टर्म रोजगार की योजना
सीटू नेता ने कहा कि जिस फिक्स्ड टर्म रोजगार की बात सरकार कर रहा है। वह सेक्टर 9 अस्पताल में शुरू हो चुका है। पिछले दिनों भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने मिनी रत्न दर्जा प्राप्त हिंदुस्तान लेटेस्ट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से लगभग 140 कर्मियों को एक साल के लिए भर्ती किया है, जो सेक्टर 9 अस्पताल के अंदर एक्स-रे टेक्निशियन, ब्लड बैंक टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट एवं नर्सिंग पद पर कार्य कर रहे हैं इस माध्यम से स्थाई भर्ती पर पूर्ण रूप से रोक लगा दिया गया है। यही स्थिति संयंत्र के अंदर पैदा करना चाहते हैं।
अस्पताल कर्मियों के सामान्य मांगों को भी पूरा नहीं करना चाहता है प्रबंधन
प्रदर्शन के दौरान उपस्थित कर्मचारियों ने चर्चा के दौरान कहा कि कर्मियों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने वाले कार्यों में तो भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन एवं अस्पताल प्रबंधन तुरंत ही सेल प्रबंधन के ऊपर बात डालकर अपने आप को अलग कर लेता है।
किंतु पदनाम जैसे मुद्दों पर भी प्रबंधन की टाल मटोल नीति स्पष्ट बताती है कि वह कर्मियों को कुछ भी नहीं देना चाहते हैं, क्योंकि अस्पताल की जोनल समिति ने प्रबंधन के सामने रखे हुए मांग पत्र में मांग किया था कि नर्सिंग सिस्टर की जगह पर नर्सिंग ऑफिसर एवं टेक्निशियन के जगह पर टेक्निकल ऑफीसर का पद नाम दिया जाए, जो देश के अन्य अस्पतालों में पहले से लागू है।
प्रबंधन इन मुद्दों पर उचित कदम उठाने का आश्वासन देकर अभी तक कुछ भी नहीं किया है। यदि अस्पताल प्रबंधन का यही रवैया रहा तो पदनाम के मुद्दे पर जल्द ही अस्पताल के कर्मियों को साथ लेकर सीटू उच्च समिति को साथ लेकर उग्र कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।











