बोकारो स्टील प्लांट ने साल भर के भीतर 60 से अधिक धार्मिक व अन्य भवनों का लीज कैंसिल किया था। दिल्ली तक हड़कंप मचने के बाद नई पॉलिसी आई।
- बोकारो की जुबां से निकल पड़ा कि अगर, श्रेयवीर इतने ही बहादुर हैं तो कर्मचारियों और अधिकारियों के मुद्दों को भी हल करा लें।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो/भिलाई। SAIL New Lease Policy: श्रेय लेने का नेताजी कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। चाहे बड़ा हो। या छोटा काम। सेल न्यू लीज़ पॉलिसी को भी नहीं छोड़ा गया। सेल ने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च समेत अन्य भवनों का महज 1 रुपए में लीज नवीनीकरण का आदेश दिया। जिस बोकारो ने पूरा काम कराया, वह खामोशी से सारा राज़ दबाए बैठा रहा। भिलाई के श्रेयवीर मुफ्त में वाहवाही बटोरने में जुट गए।
इस पूरी पॉलिसी को बदलवाने की शुरुआत बोकारो स्टील प्लांट से हुई। पिछले साल के भीतर 60 से ज्यादा धार्मिक, व्यपारिक भवनों का लीज कैंसिल किया गया। जिसका करीब 20 से 25 साल का नवीनीकरण लंबित था, जिससे कंपनी को आर्थिक नुकसान भी हो रहा था। राजस्व नहीं प्राप्त हो रहा था। इससे हड़कंप मचा। इसका नतीजा ये आया कि इस्पात मंत्रालय व स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड एक टांग पर खड़ा नज़र आया। सेल के पूर्व सीएमडी अमरेंदु प्रकाश ने खुद कमान संभाली और पूरी पॉलिसी को बदलने की शुरुआत कराई थी। जिसका नतीजा ये आया कि सेल प्रबंधन ने नई लीज़ पॉलिसी को लागू किया।
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आदेश की कॉपी किसी के हाथ लगी। फिर, देखते ही देखते श्रेय लेने वालों की होड़ मच गई। रविवार को भी कुछ तमाशा किया गया। मीडिया में एक छुटभैया नेता की फोटो देख सेल के अधिकारी हंस पड़े। रहा नहीं गया, सच्चाई उजागर हुई। इसी के साथ श्रेय लेने वाले भिलाई के नेताजी भी बेनकाब हो गए। सारे दस्तावेज और बुनियादी काम बोकारो के हिस्से आया, लेकिन श्रेय भिलाई के नेताजी बटोर रहे।
इस सच्चाई में एक ऐसा भी पक्ष है, जिसे सूचनाजी.कॉम जान-बूझकर नहीं लिख रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय सम्मान का विषय है। छुट्टभैया नेताओं की हरकतों से देश के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।
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सेल कारपोरेट आफिस के एक अधिकारी ने यहां तब बोल दिया कि कुछ सच्चाई को उजागर न करने की मजबूरी का फायदा श्रेय लेने वाले उठा रहे। जिसको मुद्दे के बारे में पता नहीं, न्यू लीज पॉलिसी का ऑर्डर आते ही सबसे पहले वही उछला। इन हरकतों से भिलाई की जग हंसाई हो रही है। सबके सामने हंसी का पात्र बन रहे।
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बोकारो स्टील प्लांट ने सबसे पहले तीन-चार नोटिस देने के बाद लीज को कैंसिल करना शुरू किया था। मामला कोर्ट तक गया था। सारे लोग कारपोरेट आफिस का रूप किए। बोर्ड और नियम की शर्तों का पालन करते हुए कार्रवाई हुई थी। इसलिए किसी की कोई दाल नहीं गली।
अंत में ऐसी जगह एक समाज चला गया, जहां सारी सज़ा तक माफ हो जाती है। फिर, सेल को पूरी पॉलिसी बदलनी पड़ी। एक कमेटी गठित की गई, जिसके बाद नई पॉलिसी की सौगात दी गई। यही वजह है कि धार्मिक संगठनों को पूरी तरह से छूट दी गई है। बोकारो की जुबां से निकल पड़ा कि अगर, श्रेयवीर इतने ही बहादुर हैं तो कर्मचारियों और अधिकारियों के मुद्दों को भी हल करा लें।
आप भी जानिए न्यू लीज़ पॉलिसी के बारे में विस्तार से
किन पर लागू होगी नई नीति
नई नीति केवल पुरानी लीज और सब-लीज के नवीनीकरण पर लागू होगी। इसमें…
जिनकी लीज 15 मई 2026 से पहले समाप्त हो चुकी है।
जिनकी लीज भविष्य में समाप्त होने वाली है।
यह नीति नई लीज आवंटन पर लागू नहीं होगी।
तीन श्रेणियों में बांटा गया पूरा ढांचा
सेल ने सभी लीजधारकों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया
श्रेणी-1: व्यावसायिक संस्थान
दुकानें
दुकान-सह-आवास
पेट्रोल पंप
सिनेमा हॉल
बैंक
एटीएम
बीमा कंपनियां
केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक उपक्रम
श्रेणी-2: सरकारी एवं गैर-व्यावसायिक संस्थान
आयकर विभाग
ईएसआईसी
सीआईएसएफ
डाकघर
जिला प्रशासन
पुलिस विभाग
नगर निगम
कर्मचारी सहकारी आवास समितियां
स्कूल
कॉलेज
शैक्षणिक संस्थान
आईसीएआई, आईसीएमएआई जैसे पेशेवर संगठन
श्रेणी-3: धार्मिक, सामाजिक और चैरिटेबल संस्थान
मंदिर
मस्जिद
चर्च
गुरुद्वारा
श्मशान घाट
कब्रिस्तान
रामकृष्ण मिशन
ब्रह्माकुमारी
अरविंद सोसायटी
सार्वजनिक पुस्तकालय
चैरिटेबल स्कूल
चैरिटेबल अस्पताल
दिव्यांग विद्यालय
महिला समितियां
कर्मचारी संगठन
किसे कितना देना होगा?
व्यावसायिक संस्थान
दुकानदारों और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को भूमि के वर्तमान मूल्य (Land Premium) का 25 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा।
सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थान
इन संस्थाओं को भूमि मूल्य का 10 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा।
धार्मिक और सामाजिक संस्थान
इन संस्थाओं को सिर्फ ₹1 टोकन राशि देकर लीज नवीनीकरण कराया जा सकेगा। यही वह प्रावधान है जिसे भिलाई और अन्य टाउनशिप की धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
₹1 में नवीनीकरण, लेकिन अन्य शुल्क रहेंगे
हालांकि केवल नवीनीकरण शुल्क ₹1 होगा।
धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को भी निम्न शुल्क देने होंगे जैसे
सिक्योरिटी डिपॉजिट
वार्षिक ग्राउंड रेंट
सर्विस चार्ज
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ये शुल्क श्रेणी-2 के समान दरों पर लागू होंगे
- सिक्योरिटी डिपॉजिट कितना लगेगा? नई नीति के अनुसार
- सिक्योरिटी डिपॉजिट = (वार्षिक ग्राउंड रेंट + सर्विस चार्ज) × 3
- यह एक बार जमा करना होगा और इस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
हर साल देना होगा ग्राउंड रेंट
लीज नवीनीकरण के बाद
वार्षिक ग्राउंड रेंट = नवीनीकरण शुल्क का 1%
हर 5 वर्ष में 10% वृद्धि
सर्विस चार्ज भी देना होगा
वार्षिक सर्विस चार्ज = नवीनीकरण शुल्क का 2%
हर 5 वर्ष में 10% वृद्धि
स्कूल-कॉलेज और बड़े ट्रस्ट पर भी नजर
नई नीति में एक महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है। यदि कोई स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था या ट्रस्ट पिछले 5 वर्षों में औसतन 50 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रहा है और उसकी आय उसके खर्च से 15% अधिक है, तो उसे अगली उच्च श्रेणी के अनुसार शुल्क देना पड़ सकता है। इसकी समीक्षा हर पांच वर्ष में होगी।
खाली जमीन रखने वालों के लिए राहत
यदि किसी संस्था को बड़ी जमीन आवंटित की गई है लेकिन निर्माण 50% से कम क्षेत्र में हुआ है, तो उसे पूरी जमीन का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में निर्मित क्षेत्र के 1.5 गुना हिस्से पर नियमित शुल्क लगेगा।
शेष जमीन पर “राइट टू यूज” मिलेगा।
उस पर केवल वार्षिक ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज देना होगा।
पुराने मामलों के लिए आम माफी योजना
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नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेल ने एक प्रकार की वन-टाइम एमनेस्टी (आम माफी) योजना दी है।
यदि एक वर्ष के भीतर नवीनीकरण करा लिया
केवल नवीनीकरण शुल्क पर SBI कैश क्रेडिट दर से साधारण ब्याज लगेगा।
कोई दंडात्मक ब्याज नहीं लगेगा।
पुराने बकाए पर पेनल्टी माफ होगी।
यदि एक वर्ष बाद नवीनीकरण कराया
12% वार्षिक दंडात्मक ब्याज देना होगा।
लीज नहीं कराई तो क्या होगा? यदि कोई लीजधारी…
आवेदन नहीं करता
शुल्क जमा नहीं करता
नोटिस का जवाब नहीं देता
तो उसे अनधिकृत कब्जाधारी (Unauthorized Occupant) माना जाएगा। इसके बाद सेल…
लीज समाप्त कर सकती है
बेदखली की कार्रवाई कर सकती है
बकाया वसूली कर सकती है
क्षतिपूर्ति वसूल सकती है
स्थानीय स्तर पर होगी जांच
प्रत्येक संयंत्र में तीन सीजीएम स्तर के अधिकारियों की एक स्थायी समिति बनाई जाएगी। यह समिति तय करेगी
संस्था किस श्रेणी में आती है
जमीन का वास्तविक उपयोग क्या है
श्रेणी बदलनी है या नहीं
अंतिम स्वीकृति संबंधित फंक्शनल डायरेक्टर देंगे।
भिलाई, बोकारो और राउरकेला में सबसे ज्यादा असर
इस नीति का सबसे अधिक प्रभाव उन टाउनशिप क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां वर्षों से लीज नवीनीकरण के मामले लंबित हैं। भिलाई स्टील प्लांट, बोकारो स्टील प्लांट और राउरकेला स्टील प्लांट क्षेत्रों में सैकड़ों दुकानें, धार्मिक स्थल, स्कूल और सामाजिक संस्थाएं इस नीति के दायरे में आएंगी।
क्या है सबसे बड़ी राहत?
नई नीति का सबसे बड़ा लाभ यह माना जा रहा है कि धार्मिक संस्थाओं का नवीनीकरण ₹1 में होगा।
वर्षों से चल रहा ब्याज और दंडात्मक विवाद समाप्त होने का रास्ता खुलेगा।
एक साल की राहत अवधि मिलेगी।
पुराने लंबित मामलों के समाधान का अवसर मिलेगा।
दुकानदारों, संस्थाओं और सेल प्रबंधन के बीच चल रहे कई विवाद सुलझ सकते हैं।

