जीपी सिंह ने वर्ष 1988 में भिलाई स्टील प्लांट में करियर शुरू किया। QCFI-इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल से जेपी सिंह काफी सुर्खियों में हैं।
- SAIL द्वारा उन्हें सेफ्टी एडवाइजर नियुक्त किए जाने को कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) सेफ्टी एंड फायर सर्विसेज गोपाल प्रसाद सिंह (जीपी सिंह) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। SAIL प्रबंधन ने उन्हें सेफ्टी एडवाइजर (Safety Advisor) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति एक वर्ष की अवधि के लिए की गई है। सुरक्षा प्रबंधन, औद्योगिक नवाचार और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी दी गई है।
जीपी सिंह देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी मद्रास (चेन्नई) से वर्ष 1988 में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बी-टेक हैं। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1999 में इग्नू से एमबीए (फाइनेंस) किया। उन्होंने नेशनल सेफ्टी काउंसिल से इंडस्ट्रियल सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी और केमिकल सेफ्टी में भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
भिलाई स्टील प्लांट में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव
जीपी सिंह ने वर्ष 1988 में भिलाई स्टील प्लांट में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। जनवरी 1989 से जनवरी 2020 तक उन्होंने इंस्ट्रूमेंटेशन एंड ऑटोमेशन विभाग में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान उन्होंने ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट, पावर प्लांट तथा कोक ओवन एंड कोल केमिकल प्लांट में कार्य किया। फरवरी 2020 से जून 2023 तक उन्होंने सीजीएम (सेफ्टी एंड फायर सर्विसेज) के रूप में कार्य किया और सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ठेका मजदूरों को सुरक्षा प्रशिक्षण देने की अनूठी पहल
इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल सुरक्षा प्रबंधन में कार्मिक एवं ठेका श्रमिकों की भागीदारी बढ़ाने के साथ ही इन्हें जहां खतरे की पहचान करने एवं खतरे का पता लगाने में मददगार साबित होगा। वहीं जोखिम की धारणा को समझने एवं जोखिम को भांपने, तथा इसे समाप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। फ्रंटलाइन मैनेजर्स से लेकर सभी कार्मिकों को सुरक्षित कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।
चार बार मिला विश्वकर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार
जीपी सिंह को नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें वर्ष 1998, 2000, 2002 और 2003 में विश्वकर्मा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वर्ष 1997 में कॉर्पोरेट स्तर का बेस्ट सजेशन अवॉर्ड तथा वर्ष 2009 में प्रतिष्ठित एमडी ट्रॉफी फॉर मोस्ट इनोवेटिव मैनेजर भी प्राप्त हुआ।
पेटेंट और कॉपीराइट के क्षेत्र में भी पहचान
औद्योगिक नवाचार के क्षेत्र में जीपी सिंह का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनके नाम पेटेंट (Patent) और कॉपीराइट (Copyright) भी है। 6 पेटेंट और 2 कॉपीराइट दर्ज हैं। इसके अलावा कई तकनीकी नवाचारों पर उनका कार्य उद्योग जगत में चर्चित रहा है।
इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल के जनक
भिलाई स्टील प्लांट और SAIL में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए विकसित किए गए इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल की अवधारणा के जन्मदाता भी जीपी सिंह को माना जाता है। इस मॉडल ने सुरक्षा प्रबंधन को नई दिशा दी और कर्मचारियों की सहभागिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया प्रतिनिधित्व
जीपी सिंह ने 15 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने वर्ष 2002 में लखनऊ, 2003 में टोक्यो (जापान) और 2007 में चीन में आयोजित इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन क्वालिटी कंट्रोल सर्कल (ICQCC) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे वर्ष 2007 से 2015 तक नेशनल कन्वेंशन ऑन क्वालिटी कॉन्सेप्ट्स (NCQC) में जज पैनल के सदस्य भी रहे।
वर्तमान में कई राष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़े
सेवानिवृत्ति के बाद भी जीपी सिंह औद्योगिक सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (QCFI) के उपाध्यक्ष हैं तथा सेफ्टी स्किल डेवलपमेंट फाउंडेशन (SSDF) की नेशनल ऑक्यूपेशनल स्टैंडर्ड्स कमेटी के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। SAIL द्वारा उन्हें सेफ्टी एडवाइजर नियुक्त किए जाने को कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

