बालोद में फूटा आक्रोश: भाकपा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, माकपा और भारतीय बौद्ध महासभा ने संयुक्त रैली निकाल निकाली।
- संगठनों के कार्यकर्ता, युवा और छात्र भारी संख्या में दल्ली राजहरा के जैन भवन चौक पर एकत्रित हुए।
सूचनाजी न्यूज, राजहरा। देश के छात्रों व युवाओं के भविष्य और दिल्ली में आंदोलनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में बालोद जिला मुख्यालय और दल्ली राजहरा में भारी जनाक्रोश देखने को मिला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (छमुमो), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय बौद्ध महासभा और कांग्रेसियों के संयुक्त तत्वावधान में आज एक विशाल आक्रोश मोर्चा निकाला गया।
सभी संगठनों के कार्यकर्ता, युवा और छात्र भारी संख्या में दल्ली राजहरा के जैन भवन चौक पर एकत्रित हुए जहां केंद्र सरकार की छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ गगनभेदी नारों के साथ एक आम सभा भी हुई। सभी संगठनों के वक्ताओं के द्वारा भाषण दिया गया साथ एक विशाल आक्रोश रैली शुरू हुई। हाथों में बैनर-तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने जैन भवन चौक से लेकर एसडीएम (SDM) कार्यालय तक पैदल मार्च किया। पूरे रास्ते केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के दमन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की गई।
इसके बाद एसडीएम कार्यालय का घेराव करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया। दिल्ली में सुबह 07:30 बजे हुई दमनकारी गिरफ्तारी का विरोध किया। नेताओं ने संयुक्त रूप से बताया कि आज सुबह 07:30 बजे दिल्ली पुलिस द्वारा संसद घेराव का आह्वान कर रहे छात्र-नेताओं को अमानवीय और असंवैधानिक तरीके से हिरासत में ले लिया गया। इस दमनकारी कार्रवाई के विरोध में आज छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सभी प्रगतिशील और जनवादी ताकतों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की है और छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की मांग की है।
पेपर लीक और 21 छात्रों की आत्महत्या पर गहरा दुखआंदोलनकारी संगठनों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में NEET-UG, UGC-NET, REET, UPTET और विभिन्न प्रांतीय शिक्षक व प्रशासनिक परीक्षाओं (BPSC, UPPSC, महाराष्ट्र TET) में लगातार हुए पेपर लीक ने देश की साख मिट्टी में मिला दी है। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इस परीक्षा तंत्र की धांधली और मानसिक तनाव के कारण अब तक 21 होनहार छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार संवेदनहीन बनी हुई है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 30 दिनों से जारी ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और देश के मशहूर वैज्ञानिक सोनम वांगचुक के समर्थन के बाद भी सरकार आंखें मूंदे बैठी है। संयुक्त मोर्चे की प्रमुख मांगें:शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: NEET पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से बर्खास्त किया जाए या उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार हो। शहीद छात्रों को मुआवजा: परीक्षा की अव्यवस्था के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हुए प्रत्येक छात्र के पीड़ित परिवार को केंद्र सरकार ₹1 करोड़ का मुआवजा दे।
उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच: NEET सहित हाल के सालों में हुए सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पेपर लीक घोटालों की सर्वोच्च स्तर पर स्वतंत्र व समयबद्ध जांच कराई जाए।शिक्षा माफियाओं पर जेल: पेपर लीक कराने वाले माफियाओं, संलिप्त कोचिंग संचालकों और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई हो।
इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भारतीय कम्यूनिष्ट पार्टी से जिला सचिव अनिल यादव, राजेन्द्र बेहरा,अमरीक सिंह, गौतम बेरा, इन्द्र कुमार साहू,निशांत सूर्यवंशी,हरिशंकर राव,आर के सोनटेके, भारतीय बौद्ध महासभा से दिलीप सुखदेव,हेमंत कांडे, त्रिभुवन रंगारी,अशोक बाम्बेश्वर,नीता रामटेके,आशा नोनहारे, हल्बा समाज से विद्या रावटे, छात्राओं के ओर से दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा निशा नशीने, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से पी सीमैय्या, विनोद मिश्रा, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा से पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, सोमनाथ वीके, डॉ वैध्य, कांग्रेस से रतिराम कोसमा, ईश्वर राव, कुलदीप नोनहारे, लक्ष्मण शर्मा,अनूप बाम्बेश्वर के साथ साथ कई छात्र और पार्टी के सदस्यों की भरी भीड़ रही।

