नियमों को दरकिनार करने वाले कैंटीन आपरेटरों-ठेकेदारों से भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन बिजली-पानी और भवन का किराया वसूले।
- सेक्टर 9 हॉस्पिटल में संचालित कैंटीन में इडली नियम के तहत ₹10 में 3 दी जानी चाहिए, वह 20 रुपए में 4 दी जा रही है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई कर्मचारी यूनियन ने कैंटीन संचालकों की मनमानी एवं कर्मचारियों को आ रही परेशानियों के संदर्भ में एक ज्ञापन मुख्य महाप्रबंधक के नाम आईआर विभाग के सीनियर मैनेजर राहुल धोटे को सौंपा, जिसमें निम्न बिंदुओं की ओर उनका ध्यान आकर्षित करवाया गया है।
1.कैंटीन संचालकों की मनमानी चरम सीमा पर है। शिकायत आ रही है कि जिन सामानों को बेचने का कांट्रेक्ट हुआ है उसमें कुछ सामान तो बनाये ही नहीं जाते हैं और जो बनाए भी जा रहे हैं वह तय मात्रा से कम वजन के रहते हैं।
2. यूनियन का कहना है कि संयत्र के भीतर संचालित कुछ कैंटीन तो ऐसा लगता है जैसे वह संयंत्र के नियमों से बाहर हों, उनकी मनमानी यह है कि चाय पराठा भोजन सब बाजार भाव से भी दोगुना दाम पर बेचेंगे, पर जिन सामान का कान्ट्रेक्ट हुआ है वह मिल जाए तो बड़ी बात है। जबकि संयंत्र की ओर से बिजली पानी मकान फर्नीचर फ्री में दिया गया। यह किसकी शह पर चल रहा है। जांच का विषय तो होना चाहिए।
3. इसी प्रकार सेक्टर 9 हॉस्पिटल में संचालित कैंटीन की मनमानी यह है कि जो इडली नियम के तहत ₹10 में 3 दी जानी चाहिए, वह 20 रुपए में 4 दी जा रही है। ढोकला, पोहा सब क्वांटिटी से कम। विरोध करने पर वही जवाब आपको जहां बोलना है बोल दीजिए। ऐसा लगता है प्रबंधन में इन लोगों को लूट की छूट दी हुई हैं।
4. तेल की गुणवत्ता तय नहीं-सभी कैंटीन में सस्ते एवं रीसायकल किया हुआ तेल का उपयोग कर कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस कारण पेट संबंधी बीमारियों की शिकायत है लगातार बढ़ रही है। इस पर ध्यान दिया जाए और उच्च गुणवत्ता का तेल की क्वालिटी सुनिश्चित की जाए।
5. संयंत्र में कार्यरत 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मी विभिन्न बीमारियों से ग्रसित रहते हैं, पर उनके लिए कैंटीनों में हेल्दी फूड की कोई व्यवस्था नहीं है। सभी कैंटीनों में तेल से बने आइटम ही रहते हैं, जिन्हें मजबूरी में उन्हें इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे उनका स्वास्थ्य और खराब हो रहा है। सभी कैंटीनों में उपमा, ढोकला, स्प्राउट्स, ब्यायल चना जैसे फूड उपलब्ध करवाए जाने चाहिए।
6. . महारत्न कंपनी के अनूरूप हमारी कैंटीनों में बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं है। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। साफ सुथरी व्यवस्थित कैंटीनों का निर्माण किया जाए। वाटर कूलर, फ्रिज, टेबल, कुर्सी तथा सभी कैंटीन कर्मियों का ड्रेस कोड होना हो।
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7. कैंटीनों की गुणवत्ता सुधारने के लिए काफी हाउस की तरह सभी कैंटीन को सब्सिडी दी जानी चाहिए।
8. संयंत्र के अन्दर सर्वसुविधायुक्त बेस किचन कैंटीन बनाई गई है, जिसे बंद कर दिया गया है। उसे काफी हाउस के माडल पर तैयार कर कर्मचारियों के एक अच्छी सुविधा दी जानी चाहिए।
9. एक ही ठेकेदार को कई कैंटीन दे दी गई है, जिसे वह पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर किराए के रूप में अन्य कैंटीन संचालकों को दे दिया है। इस कारण खाद्य सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। यूनियन का सुझाव है कि जो संचालक जिन कैंटीनों को अच्छी तरह चल पा रहे हैं, उसका ठेका उन्हीं को दे दिया जाना चाहिए।
9. ठेकेदार एवं कैंटीन संचालकों के नाम स्पष्ट रूप से सभी कैंटीन के सामने लिखे जाने चाहिए।
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बिजली-पानी और भवन का किराया वसूलें
यूनियन की मांग है कि जो कैंटीन आपरेटर निर्धारित सामान को उपलब्ध नहीं करवा रहे है और बाहरी सामान जो अधिक प्रॉफिट वाले है, उनको बेचता है, ऐसे ठेकेदार से प्रबंधन बिजली-पानी और भवन का किराया वसूले। भिलाई कर्मचारी यूनियन ने उपरोक्त मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग किया है।
मीटिंग में अध्यक्ष राजेश चौहान, महामंत्री अशोक माहौर, कार्यकारी अध्यक्ष आनंद पाण्डेय, श्रीनिवास मिश्रा, कोषाध्यक्ष प्रवीण मारडीकर, उपाध्यक्ष तरूण सेमुअल, अवधेश पाण्डेय, ओम प्रकाश, तीतरमारे डीजीएस बिष्णु साहू एवं रामजी सिंह उपस्थित थे।

