एनजेसीएस नेता बोले-MOU के अनुसार वेतनमान 1 जनवरी 2017 से प्रभावी है, इसलिए इस अवधि का एरियर कर्मचारियों को मिलना चाहिए।
- SAIL कर्मचारियों के 2017-2020 के एरियर पर फिर गरमाया विवाद, 20 नवंबर को अगली सुनवाई।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। सेल कर्मचारियों के बकाया 39 माह के एरियर, लंबित वेतन समझौता,आंदोलन के समय ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों के मुद्दे पर श्रमायुक्त कार्यालय में बड़ी बैठक हुई। एक साल तक प्रबंधन द्वारा कोई कार्रवाई न करने से नाराज यूनियन नेताओं ने केंद्रीय श्रमायुक्त से शिकायत की थी। गुरुवार को दिल्ली में बैठक हुई। सेल प्रबंधन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा गया कि जल्द से जल्द मीटिंग बुलाकर मामले को खत्म कीजिए। साथ ही श्रमायुक्त ने दोबारा मीटिंग के लिए 20 नवंबर की तारीख तय कर दी है। इससे पहले ही सेल प्रबंधन को एनजेसीएस नेताओं के साथ वार्ता करना है।
पिछली बार अक्टूबर में मीटिंग हुई थी। प्रबंधन को कहा था कि 2 माह के अंदर मीटिंग करके रिपोर्ट भेजिए। अब फिर कहा-आपस में वार्ता कीजिए। 20 नवंबर को फिर बैठक होगी। डिप्टी चीफ लेबर कमिशनर आइआर निरंजन कुमार, अश्विनी यादव-रिजनल लेबर कमिशनर मुख्यालय की मौजूदगी में बैठक हुई। एटक के विद्यासागर गिरी ने कहा-कानूनी के ऊपर इस्पात मंत्रालय नहीं हो सकता है। एग्रीमेंट का उल्लंघन अपराध है। चीफ लेबर कमिशनर पूर्व में बोल चुके हैं एग्रीमेंट का उल्लंघन सेल न करे। प्रबंधन की तरफ से सीजीएम एचआर एसके गुप्ता, जीएम मलय गोस्वामी, बबिता और एटक से विद्यासागर गिरी, इंटक से विप्लब मांजी, सीटू के ललित मिश्रा, एचएमएस के विप्लव दास आदि मौजूद रहे।
20 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
दोनों पक्षों की आपसी सहमति से 3 सितंबर 2026 की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। मामले की अगली तारीख 20 नवंबर 2026 को सुबह 11:30 बजे निर्धारित की गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 के बीच की अवधि का वेतन एरियर वास्तव में कर्मचारियों को मिलेगा या यह अवधि केवल नोटिनल कैलकुलेशन तक सीमित रहेगी? 20 नवंबर की अगली सुलह बैठक में इस मुद्दे पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।
एरियर का मुद्दा फिर गरमा गया
सेल कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण से जुड़े 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक के लंबित एरियर का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। केंद्रीय श्रम आयुक्त (Central) के समक्ष हुई सुलह कार्यवाही में यूनियनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उक्त अवधि के एरियर का भुगतान कर्मचारियों को किया जाना चाहिए, जबकि सेल प्रबंधन ने इस अवधि को नोटिनल कैलकुलेशन के लिए लिया जाना बताते हुए वास्तविक भुगतान 1 अप्रैल 2020 से किए जाने की बात दोहराई है।
यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि 31 अक्टूबर 2025 के बाद उनकी मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है। 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि के एरियर का भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष है। यह मामला 22 अक्टूबर 2021 को प्रबंधन और यूनियनों के बीच हुए MOU से जुड़ा है।
यूनियनों ने MOU का हवाला देकर मांगा एरियर
बैठक में यूनियन पक्ष ने तर्क दिया कि MOU में कहीं भी 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक की अवधि को केवल नोशनल कैलकुलेशन के लिए रखने का उल्लेख नहीं है। MOU के अनुसार वेतनमान 1 जनवरी 2017 से प्रभावी है, इसलिए इस अवधि का एरियर कर्मचारियों को मिलना चाहिए।
यूनियन ने MOU के पैरा 6.1 और 7.1 का हवाला देते हुए कहा कि 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक के एरियर के संबंध में NJCS की सब-कमेटी द्वारा काम किया जाना था। यूनियनों का कहना है कि MOU में यह नहीं लिखा है कि इस अवधि का एरियर नहीं दिया जाएगा या इसे केवल नोटिनल कैलकुलेशन में शामिल किया जाएगा।
9 दिसंबर 2025 की बैठक में भी नहीं निकला समाधान
कार्यवाही में यह भी सामने आया कि 9 दिसंबर 2025 को NJCS की बाइपार्टाइट सब-कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
यूनियन प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि 2024 के बाद NJCS की बाइपार्टाइट बैठक भी नहीं बुलाई गई। उन्होंने मांग की कि SAIL प्रबंधन NJCS की बैठक बुलाए और इस मुद्दे का अंतिम समाधान किया जाए। साथ ही नई वेतन पुनरीक्षण व्यवस्था के अनुसार HRA लागू करने की मांग भी उठाई गई।
प्रबंधन का क्या कहना है
सेल प्रबंधन के प्रतिनिधि ने बैठक में कहा कि इस्पात मंत्रालय/भारत सरकार से प्राप्त मंजूरी के अनुसार वास्तविक भुगतान 1 अप्रैल 2020 से किया जाना था और उसी के अनुसार इसका पालन किया गया है।
प्रबंधन के अनुसार 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 की अवधि को केवल नोटिनल कैलकुलेशन के लिए लिया गया है। प्रबंधन ने यह भी बताया कि इस अवधि से संबंधित बेसिक, DA और सुपरएनुएशन बेनिफिट के एरियर का भुगतान 1 अप्रैल 2020 से किया जा चुका है।
प्रबंधन का तर्क था कि जब NJCS की सब-कमेटी में भी इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनी, तो NJCS की बैठक में चर्चा करने का कोई विशेष औचित्य नहीं है। प्रबंधन ने यह भी कहा कि वेतन पुनरीक्षण को इस्पात मंत्रालय/भारत सरकार द्वारा स्वीकृत नियम एवं शर्तों के अनुसार लागू किया गया है।
श्रम विभाग ने दोनों पक्षों को बातचीत जारी रखने की सलाह दी
दोनों पक्षों के बीच विवाद पर केंद्रीय श्रम आयुक्त कार्यालय ने औद्योगिक शांति और सौहार्द के हित में प्रबंधन एवं यूनियनों को आपसी बातचीत जारी रखने की सलाह दी है। सुलह अधिकारी ने कहा कि बातचीत का परिणाम अगली सुलह बैठक में बताया जाए।
