- सिंटर के प्रति टन में 0.5 किलोग्राम कोक रेट में कमी प्राप्त हुई है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के सिंटर प्लांट 3 के मशीन 1 में हॉट एयर फैन (अनक्लीन-1 एवं 2) की सफलतापूर्वक कमीशनिंग एवं उद्घाटन किया गया, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये फैन पिछले 12 वर्षों से बंद पड़े थे, जिन्हें अब डीकार्बोनाइजेशन परियोजना के अंतर्गत पुनः चालू किया गया है। यह पहल सतत एवं कुशल प्लांट संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन फैनों के कमीशनिंग से वायु परिसंचरण में सुधार हुआ है तथा अपशिष्ट ऊष्मा (वेस्ट हीट) का बेहतर उपयोग संभव हुआ है, जिससे प्रक्रिया स्थिरता में वृद्धि, ऊर्जा खपत में कमी तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। यह पहल ऊर्जा दक्षता, संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति प्लांट की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इस पहल से प्रक्रिया की स्थिरता में और सुधार, सिस्टम में बेहतर तापमान नियंत्रण तथा समग्र संचालन प्रदर्शन में वृद्धि की अपेक्षा है। साथ ही, सिंटर के प्रति टन में 0.5 किलोग्राम कोक रेट में कमी प्राप्त हुई है। लंबे समय से बंद उपकरणों का पुनः संचालन टीम की तकनीकी दक्षता एवं संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसका उद्घाटन बीके बेहरा (सीजीएम, प्रभारी एम एंड यू) द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्लांट नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जिनमें पीके सिंह (सीजीएम मैकेनिकल), एचके सचदेव (सीजीएम शॉप्स), सजीव वर्गीज़ (सीजीएम ओएचपी एवं एसपी 3), एवं एस. सी. चांवरिया (जीएम ऑपरेशन, एसपी 3) शामिल थे। इनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन संभव हो सका।
यह उपलब्धि आई. वी. रमना (जीएम एमएम, एसपी 3) के नेतृत्व में पूरी टीम के समर्पित प्रयासों से संभव हो सकी। एसपी 3 एवं पीईएम के प्रमुख टीम सदस्यों में एके बेडेकर (जीएम), आरडी शर्मा (जीएम), एमयू राव (डीजीएम), वीकेसैनी (एजीएम, पीईएम), दिनेश मानिकपुरी (डीएम), केवल कुमार साहू (एसएम), जितेश एच. सहानी (एसएम), विपिन मौर्य (एसएम), एससी साहू (एजीएम), आर. एल. साहू (एएम) एवं एस. सत्पथी (डीजीएम) शामिल हैं। योजना, पुनरुद्धार (रिफर्बिशमेंट) से लेकर कमीशनिंग तक इनका निरंतर योगदान सराहनीय है।
यह कार्य केंद्रीय एजेंसियों के महत्वपूर्ण सहयोग के बिना संभव नहीं हो पाता। इनमें बी. मधु पिल्लै (जीएम, इंस्ट्रुमेंटेशन), एस. के. पाटिल (एसएम, इंस्ट्रुमेंटेशन), बी. एन. झा (जीएम, सीईडी), संतोष के. साहू (डीजीएम, एचएमई), अतुल भाड़े (डीएम, एचएमई) एवं एसके सारंगी (एजीएम, पीएलईएम) का विशेष योगदान रहा।
















