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Bhilai Steel Plant से 3 हजार करोड़ की लोहा चोरी, जबकि एरियर में चाहिए करीब 1,000 करोड़, CMD साहब दीजिए ध्यान…

Azmat ali 05/06/2026 1 minute read
Steel worth Rs 3,000 Crore Stolen from Bhilai Steel Plant, while Around Rs 1000 crore is Required in Arrears CMD Sir Please Pay Attention

भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने प्रबंधन के रवैये पर कहा-चोरियों पर आखिर जिम्मेदार कौन?

  • 39 माह का एरियर्स अब भी लंबित। कर्मचारी और अधिकारी दोनों प्रभावित हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल प्रबंधन के रवैये को लेकर पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने सीएमडी को पत्र भेजा है। सीटू ने औद्योगिक संबंध विभाग के माध्यम से सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की महारत्न कंपनी सेल के विभिन्न इस्पात संयंत्रों में लगभग 50,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। एक ओर कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण से संबंधित लगभग 39 माह के एरियर्स का भुगतान अब तक लंबित है।

यदि प्रति कर्मचारी औसतन ₹2 लाख एरियर्स देय माना जाए, तो कुल राशि लगभग ₹1,000 करोड़ बैठती है। कर्मचारियों का मानना है कि यह उनका वैध अधिकार है, जिसका समयबद्ध भुगतान किया जाना चाहिए। यदि अधिकारियों के 39 महीने का भी एरियर्स दिया जाए तो और ₹600 से ₹700 करोड़ रूपया खर्च होगा।

भिलाई में हजारों करोड़ की चोरी पर सवाल, तय हो सीआईएसएफ की जवाबदेही

दूसरी ओर, भिलाई इस्पात संयंत्र में ही ₹3,000 करोड़ से अधिक मूल्य की कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे है। इससे यह गंभीर प्रश्न उठता है कि कंपनी की संपत्तियों और संसाधनों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में चोरी पकड़ी जा सकती है, तो यह भी संभव है कि कई अन्य मामलों का अभी तक पता न चला हो। संयंत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ की है। संयंत्र से इतनी बड़ी चोरी का सामान गेटों से बाहर निकल गया। किंतु अभी तक सीआईएसएफ की जवाब देही तय नहीं हो पाई है।

एरियर्स की राशि बनाम वित्तीय नुकसान
कर्मचारियों के एरियर्स के लिए अनुमानित ₹1,000 करोड़ की आवश्यकता है, जबकि केवल भिलाई में पकड़ी गई कथित चोरी का मूल्य इससे लगभग 3 गुना अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच यह धारणा बन रही है कि वित्तीय संसाधनों की कमी का तर्क केवल श्रमिक हितों के मामलों में ही सामने लाया जाता है, जबकि प्रबंधन की ओर से राजस्व हानि रोकने की दिशा में अपेक्षित कठोरता दिखाई नहीं देती।

मनोबल पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव
एरियर्स का भुगतान न होने से कर्मचारियों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की सफलता उसके कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और मनोबल पर निर्भर करती है। जब कर्मचारी अपने वैध आर्थिक अधिकारों के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा करते हैं, तो उसका प्रभाव कार्य संस्कृति और उत्पादन क्षमता दोनों पर पड़ता है। कर्मचारियों का मनोबल गिराकर किसी भी उद्योग का दीर्घकालिक विकास संभव नहीं है। कंपनी की वास्तविक ताकत उसकी मशीनें नहीं, बल्कि उसके कर्मचारी होते हैं। यदि श्रमिकों का विश्वास और सम्मान सुरक्षित रहेगा, तभी सेल का भविष्य भी सुरक्षित और मजबूत रहेगा।

ठेका कर्मियों की छंटनी का दबाव
विभिन्न इकाइयों में वेज कॉस्ट अधिक होने का हवाला देकर 30 से 40 प्रतिशत तक ठेका कर्मियों की छंटनी करने के निर्देश दिए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। इससे रोजगार सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग रहा है और भविष्य को लेकर कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। रोजगार घटाने की बजाय प्रबंधन द्वारा उत्पादन और संसाधन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना अधिक उचित होगा।

काम के घंटे एवं वेतन की उड़ रही है धज्जियां
सीटू अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने कहा कि नए श्रम कानून के मुताबिक भी सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना है अर्थात यदि किसी कर्मी से चार दिन तक 12 घंटे काम लिया जाता है तो उसके सप्ताह के 48 घंटे समाप्त हो जाते हैं। किंतु प्लांट के अंदर पैसे का लालच देकर दो-दो शिफ्ट काम करवाया जा रहा है। और केंद्र सरकार या राज्य सरकार के द्वारा घोषित वेतन का दूर-दूर तक पता नहीं रहता है नियमानुसार पूरा वेतन हाथ में दे देने के बाद वापस छीन लेने की प्रथा सभी जगह धड़ल्ले से लागू है इस बात को भी सेल के अध्यक्ष के संज्ञान में लाया गया।

स्थायी रोजगार पर बढ़ता संकट
स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरस) के माध्यम से स्थायी कर्मचारियों की संख्या भी लगातार कम की जा रही है। इससे भविष्य में कार्यबल की कमी, कार्यभार में वृद्धि और रोजगार के अवसरों में गिरावट की स्थिति बनेगी। प्रबंधन को चाहिए कि वह चोरी और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करे, लंबित एरियर्स का भुगतान सुनिश्चित करे तथा रोजगार सुरक्षा और श्रमिक हितों को प्राथमिकता देकर कर्मचारियों का विश्वास पुनः अर्जित करे।

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