- जर्जर आवासों से राहत के बजाय और तनाव दिया जा रहा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन पर कर्मचारी यूनियन यूनियन भड़की हुई है। बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ का कहना है कि सेल भारत सरकार की एक महारत्न कंपनी होने के साथ ही विगत तीन वर्षों से ग्रेट प्लेस टू वर्क सर्टिफाइड कंपनी की श्रेणी को प्राप्त किए हुए है। इसका व्यवहार कंपशनेट ग्राउंड वाले कर्मियों के साथ कैसा है, यह अब जग-जाहिर हो चुका है।
यूनियन ने कुछ तस्वीरों को साझा किया है। इसकी बदहाली को बयां किया गया है। कर्मी अपने परिवारिक कारणों से एक यूनिट छोड़ दूसरे यूनिट आते हैं, वो भी नए कर्मी नहीं बल्कि कई वर्षों के सेवा देने के बाद एक दूसरे यूनिट आएं है उनके लिए आवास आवंटन में कोई भी प्रावधान न होना कितना दुर्भागपूर्ण है। कहने को हजारों की संख्या में आवास उपलब्ध है। 7000 के आस पास अवैध कब्जे में भी है।
कई बी टाइप, सी टाइप में कौन रह रहा है, इसका रिकॉर्ड भी नहीं है। उसके बाद भी जो पात्र कर्मी हैं, उन्हें आवास नहीं दिया जाना क्या प्रदर्शित करता है? स्थानांतरित कर्मियों के लिए व्यवस्था, निर्माण करना, किनका काम है। बड़े-बड़े अधिकारी आखिर किस काम के लिए बैठे हैं। अभी भी सैकड़ों की संख्या में ऐसे कर्मी हैं, जो डैमेज ब्लॉक में भी रह रहे है। कई बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें आवास नहीं मिलना, क्या प्रदर्शित करता है? दूसरी ओर आउट ऑफ टर्म एलॉटमेंट क्या सिर्फ विशेष क्रिया वालों के लिए है?
आखिर कब नींद खुलेगी प्रबंधन में बैठे उच्च अधिकारियों की?
यूनियन का कहना है कि कर्मियों को हो रही कठिनाइयों से क्या किसी का कोई वास्ता नहीं? ऐसा व्यवहार प्रशिक्षु कर्मियों के साथ भी प्रबंधन करती आ रही है, उनके लिए भी उचित आवासों की व्यवस्था नहीं करती।
इतना ही नहीं पूर्व सैनिक कर्मचारियों को भी कंपनी में किसी भी प्रकार लाभ आवास आवंटन में नहीं दिया जाता है। दूसरा ई टाइप तथा डी टाइप आवास आवंटन का भी कोई फिक्स कलैंडर नहीं है। वर्ष में दो बार निकलने की बात भी महज हवा में ही है। वहीं, भिलाई इस्पात संयंत्र की आवास आवंटन प्रणाली कितनी बेहतर है कि यह से स्थानांतरित कर्मियों को जाते ही आवंटन हो गया, तथा यहां इस प्रकार की आवास टेंपररी आवंटन में दिए जा रहे हैं, जिनमें रहना कोई जानवर के लिए भी उचित नहीं। फिर भी प्रबंधन में बैठे उच्च अधिकारियों को प्रमोशन में देर बिल्कुल नहीं होती। न ही उन्हें इस प्रकार की कर्मचारियों को हो रही असुविधाओं के लिए भी कोई सो-कौज या चार्ज शीट भी मिलता है?
आखिर क्यों आवास रहते कई पात्र कर्मी किराए के आवास में रहने को विवश हैं। सभी स्थानों पर लिखित सूचना/शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई कोई नहीं होती? वहीं, एक ओर हैप्पी स्ट्रीट, फूड स्ट्रीट, जैसे आयोजनों पर लाखों के खर्च से किसे लाभ पहुंचाने की कोशिश में है नगर सेवा विभाग?
मूलभूत आवश्यकता पर ध्यान दे प्रबंधन
डायरेक्टर इंचार्ज को इस विषय पर त्वरित संज्ञान लेकर, अविलंब कार्रवाई करनी चाहिए तथा सभी संबंधितों को पूर्ण रूपेण आवास आवंटन किए जाने चाहिए। साथ ही डैमेज ब्लॉक में रहने वालों को आउट ऑफ टर्म आवास आवंटन कर इस गंभीर विषय का समाधान करना ही चाहिए। यह महज एक मांग नहीं, बल्कि मूलभूत आवश्यकता है कर्मियों की।
हरिओम, महासचिव-BAKS बोकारो













