वाइजैग इस्पात संयंत्र के भविष्य, कर्मचारियों के हितों तथा औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को सीटू ने विस्तार से उठाया था।
- पिछले लगभग एक वर्ष में 6,000 से अधिक अनुभवी ठेका श्रमिकों को कार्य से बाहर कर दिया गया है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। आरआइएनएल हादसे के बाद अब प्रबंधन की खामियां लगातार उजागर हो रही है। सीटू ने आरोप लगाए कि 25 मई 2026 को विशाखापट्टनम स्टील प्लांट (वीएसपी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को सौंपे गए विस्तृत ज्ञापन में संयंत्र के भविष्य, कर्मचारियों के हितों तथा औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को विस्तार से उठाया गया था। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से प्रबंधन ने इन गंभीर चेतावनियों और सुझावों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया।
सीटू का कहना है कि 8 जून 2026 को संयंत्र में हुई भीषण दुर्घटना, जिसमें अब तक 9 श्रमिकों कर्मचारियों एवं अधिकारी की मृत्यु हो चुकी है तथा कई अन्य घायल हुए हैं, प्रबंधन की इसी लापरवाही और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की अनदेखी का दुखद परिणाम है।
मैनपॉवर एवं भर्ती पर जारी है गंभीर संकट
सीटू ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया था कि वर्ष 2019 के बाद से नियमित भर्ती लगभग बंद है, जबकि प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) तथा लगातार हो रहे इस्तीफों के कारण अनुभवी कर्मियों में भारी कमी आई है।
पर्याप्त मैनपॉवर के अभाव में कर्मचारियों पर कार्यभार लगातार बढ़ रहा है, जिससे उत्पादन, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। यूनियन ने चेतावनी दी थी कि कम कर्मचारियों के भरोसे विशाल औद्योगिक इकाइयों का संचालन जोखिमपूर्ण हो सकता है, किंतु प्रबंधन ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया।
ठेका कर्मियों की बहाली की मांग उपेक्षित
पिछले लगभग एक वर्ष में 6,000 से अधिक अनुभवी ठेका श्रमिकों को कार्य से बाहर कर दिया गया है। सीटू ने इन्हें पुनः कार्य पर लेने तथा आधार कार्ड आधारित प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की थी। यूनियन का कहना है कि वर्षों से संयंत्र संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन श्रमिकों को हटाने से उत्पादन व्यवस्था कमजोर हुई है तथा रखरखाव और सुरक्षा कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हजारों परिवारों की आजीविका संकट में डालने के साथ-साथ इस निर्णय ने संयंत्र की कार्यकुशलता को भी प्रभावित किया है।
कच्चे माल की उपलब्धता और गुणवत्ता पर ध्यान आवश्यक
CITU एवं SWFI से संबद्ध स्टील प्लांट एम्प्लॉइज यूनियन RINL-विशाखापट्टनम स्टील प्लांट ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध होने पर विशाखापट्टनम स्टील प्लांट ने अतीत में रिकॉर्ड उत्पादन किया है। इसके बावजूद दीर्घकालिक लौह अयस्क सुरक्षा तथा उच्च गुणवत्ता वाले कच्चे माल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। उत्पादन में आने वाली बाधाओं और आर्थिक दबावों का खामियाजा अंततः कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
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संरचनात्मक रखरखाव की अनदेखी खतरनाक
सीटू ने ज्ञापन में चेताया था कि संयंत्र की अनेक संरचनाएं लगभग तीन दशक पुरानी हो चुकी हैं। समुद्री वातावरण के कारण जंग, क्षरण और संरचनात्मक कमजोरी की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। आरएमएचपी, सिंटर प्लांट तथा अन्य महत्वपूर्ण इकाइयों में व्यापक संरचनात्मक निरीक्षण, मरम्मत और नवीनीकरण अभियान चलाने की मांग की गई थी। यूनियन का आरोप है कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की गई होती तो कई संभावित खतरों को रोका जा सकता था।
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औद्योगिक सुरक्षा पर बढ़ता खतरा बना वास्तविक त्रासदी
सीटू ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा था कि उत्पादन के नाम पर सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। पिछले एक वर्ष के दौरान अनेक कर्मचारियों एवं ठेका श्रमिकों की दुर्घटनाओं में मृत्यु हो चुकी थी। यूनियन ने अपर्याप्त रखरखाव, मैनपॉवर की कमी और बढ़ते कार्यभार को गंभीर खतरा बताया था।
दुर्भाग्य से 8 जून 2026 को एसएमएस-1 विभाग में हुई भीषण दुर्घटना ने इन आशंकाओं को सही साबित कर दिया। अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है और कई परिवार असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं। यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि सुरक्षा संबंधी चेतावनियों की लगातार अनदेखी का परिणाम है।
प्रबंधन की जवाबदेही तय हो, ठोस कदम उठाए जाएं
सीटू ने कहा है कि 25 मई 2026 को सौंपे गए ज्ञापन में उत्पादन वृद्धि, लागत नियंत्रण और संयंत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए रचनात्मक एवं व्यावहारिक सुझाव दिए गए थे। यदि उन सुझावों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती तो संभवतः आज इतने परिवार अपने प्रियजनों को न खोते। यूनियन मांग करती है कि 8 जून की दुर्घटना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा मैनपॉवर की भर्ती, ठेका श्रमिकों की बहाली, कच्चे माल की सुरक्षा, संरचनात्मक रखरखाव और औद्योगिक सुरक्षा पर तत्काल प्रभाव से ठोस निर्णय लिए जाएं। विशाखापट्टनम स्टील प्लांट को सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब और विलंब स्वीकार्य नहीं है।

