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Vizag Steel Plant के भविष्य पर संकट, संसदीय समिति से हस्तक्षेप की मांग, RINL को मर्ज करें SAIL में

Azmat ali 06/01/2026 1 minute read
Vizag Steel Plant Future in Jeopardy Union Leaders Seek Parliamentary Committees Intervention

कर्मचारियों की संख्या 2019 के 18 हजार से 9,400 रह गई है। दो वर्षों में 3,000 और सेवानिवृत्त होंगे। ठेका मजदूर 16 हजार से 8 हजार रह गए।

  • बाहरी एजेंसियों से घटिया कच्चा माल मंगाने के कारण आरआइएनएल के उत्पाद लौटाए गए। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में संयंत्र की साख को नुकसान पहुंचा।
  • आरआईएनएल के सेल (SAIL) में विलय को सबसे व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान बताया।
  • 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप होगा फेसला।

सूचनाजी न्यूज, विशाखापट्टनम। राष्ट्र्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-RINL को बचाने की आवाज वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्ष डोला सेन के सामने भी उठाई गई है। “Visakha Ukku-Andhrula Hakku” समिति की ओर से राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल)–विशाखापट्टनम स्टील प्लांट (वीएसपी) के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

समिति ने कहा है कि हालिया नीतिगत और परिचालन निर्णयों से नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम वीएसपी की उत्पादन क्षमता, वित्तीय स्थिति, कर्मचारियों का मनोबल और दीर्घकालिक स्थिरता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में 27 जनवरी 2021 को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स द्वारा वीएसपी के 100 प्रतिशत विनिवेश के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि इस फैसले से आंध्र प्रदेश में व्यापक असंतोष फैला। लोगों ने “विशाखा उक्कु-आंध्रुला हक्कु” आंदोलन के दौरान 32 शहीदों के बलिदान को याद करते हुए संयंत्र को बचाने के लिए एकजुट संघर्ष किया।

समिति ने केंद्र सरकार द्वारा घोषित ₹11,440 करोड़ के पुनरुद्धार पैकेज और आंध्र प्रदेश सरकार के ₹2,600 करोड़ के सहयोग के लिए आभार जताया, लेकिन कहा कि इसके बावजूद ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनसे संयंत्र को कृत्रिम रूप से घाटे में दिखाया जा रहा है।

पत्र में बताया गया कि केंद्र सरकार का कुल इक्विटी निवेश मात्र ₹4,889 करोड़ रहा है, जबकि वीएसपी ने अब तक केंद्र और राज्य सरकारों को ₹58,000 करोड़ से अधिक कर व लाभांश के रूप में दिया है।

वर्ष 2021 में विनिवेश की घोषणा के बावजूद संयंत्र ने ₹921 करोड़ का लाभ अर्जित किया था। इसके बाद 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में कच्चे माल की आपूर्ति न होने, रेलवे रेक न मिलने, कार्यशील पूंजी की कमी और महंगे आयातित कोयले के कारण भारी नुकसान हुआ।

तीन वर्षों में कुल घाटा ₹12,840 करोड़ तक पहुंच गया, वहीं गंगावरम पोर्ट के असहयोग से 45 दिन का उत्पादन ठप रहने से लगभग ₹7,000 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पुनरुद्धार पैकेज के बाद जब दो ब्लास्ट फर्नेस 110–115 प्रतिशत क्षमता पर चल रहे थे और अप्रैल-मई 2025 में ₹74.52 करोड़ का नकद लाभ हुआ, तब बिना पर्याप्त कच्चे माल के वर्षा ऋतु में ब्लास्ट फर्नेस-3 शुरू करने का निर्णय लिया गया।

इससे उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत गिरावट आई और लागत बढ़ गई।
बाहरी एजेंसियों से महंगे कोक और पेलेट्स की खरीद से कच्चे माल की लागत 63 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गई, जबकि सेल इकाइयों में यह 40 प्रतिशत से कम है।

गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया कि बाहरी एजेंसियों से घटिया गुणवत्ता का कच्चा माल मंगाने के कारण वीएसपी के उत्पाद लौटाए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में संयंत्र की साख को नुकसान पहुंचा है। साथ ही 42 विभागों में ईओआई के जरिए कोर ऑपरेशंस का आउटसोर्सिंग करने से लागत तीन गुना तक बढ़ गई है और नियंत्रण निजी हाथों में जाने का खतरा है।

श्रमिकों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। स्थायी कर्मचारियों की संख्या 2019 के 18 हजार से घटकर 9,400 रह गई है और अगले दो वर्षों में 3,000 और सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ठेका मजदूरों की संख्या भी 16 हजार से घटकर 8 हजार रह गई है।

अनुभवी स्थानीय कर्मियों की जगह आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति से उत्पादकता और सुरक्षा प्रभावित हो रही है। समिति ने सभी हटाए गए ठेका श्रमिकों की बहाली और नई भर्ती की मांग की है।

पत्र में मशीनरी के पुराने होने, रखरखाव की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते इस वर्ष अब तक 10 श्रमिकों की मौत का दावा किया गया है। कर्मचारियों से 12 घंटे की शिफ्ट में बिना साप्ताहिक अवकाश काम लेने, मानसिक दबाव, वेतन विसंगतियों, आवास व अन्य सुविधाओं की कटौती और असहमति जताने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आरोप भी लगाए गए हैं।

इन सभी बिंदुओं के आधार पर समिति ने आरआईएनएल–वीएसपी के सेल (SAIL) में विलय को सबसे व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान बताते हुए कहा कि यह 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। समिति ने डोला सेन से आग्रह किया है कि वे इन मुद्दों को संसद में उठाकर केंद्र सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करें।

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