
- अस्पताल में लगातार समस्याएं बढ़ती जा रही है। सीटू ने अस्पताल के संदर्भ में चर्चा करने हेतु दिसंबर माह में अस्पताल प्रबंधन से समय मांगा था
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (Bhilai Steel Plant) के सेक्टर 9 हॉस्पिटल से बड़ी खबर आ रही है। पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने खामियों को उजागर किया है, ताकि व्यवस्था सुधारी जा सके। उच्च प्रबंधन से मांग किया है कि जल्द से जल्द दवाइयों की किल्लत को दूर किया जाए।
आपातकाल में चिकित्सा हेतु अस्पताल पहुंचने के साथ ही मरीज का ब्लड प्रेशर, ईसीजी, रेंडम ब्लड शुगर जांच करना सामान्य प्रक्रिया में आता है। किंतु ऐसी घटनाएं सामने आई है, जिसमें आपातकालीन चिकित्सा में ब्ल्ड शुगर स्ट्रिप नहीं होने से बिना रैंडम शुगर जांच किए वार्ड में एडमिट कर दिया जा रहा है।
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और वार्ड के डाक्टर पूछते हैं कि कैज्यूवल्टी में रैंडम ब्लड शुगर की जांच नहीं हुई है क्या? इस बारे में छानबीन करने पर पता चला कि ब्लड शुगर स्ट्रिप की किल्लत के चलते अब कई बार आपातकालीन चिकित्सा के दौरान रेंडम ब्लड शुगर की जांच नहीं किया जाता है
अस्पताल की समस्याओं को लेकर दिसंबर माह में मांगा था समय
अस्पताल में लगातार समस्याएं बढ़ती जा रही है। सीटू ने अस्पताल के संदर्भ में चर्चा करने हेतु दिसंबर माह में अस्पताल प्रबंधन से समय मांगा था, जिस पर अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल के कार्मिक विभाग से चर्चा कर जल्द बैठक करने की बात कही थी।
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अस्पताल के कार्मिक विभाग के प्रमुख भी दूसरे जिम्मेदारी में स्थानांतरित होकर चले गए हैं। किंतु तीन महीने बीत जाने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन यूनियन से चर्चा करने हेतु समय नहीं निकाल पाया है। वैसे तो सीटू का प्रतिनिधिमंडल सामान्य चर्चा हेतु कभी भी अस्पताल प्रमुख से उनके ऑफिस में बात करके चला जाता है। किंतु मुद्दों पर आधारित बैठक होने के कारण समय लेकर बैठक किया जाना जरूरी है। इसीलिए सीटू अस्पताल प्रबंधन से बैठक हेतु समय मांगा था।
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अस्पताल प्रबंधन भी बचता है सीटू के सवालों से
महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने कहा-अब ऐसा महसूस होने लगा है कि मुद्दों पर आधारित बैठक करना शायद प्रबंधन को पसंद नहीं है। इसीलिए प्रबंधन सामान्य चर्चा तो कर लेता है। किंतु मुद्दों पर आधारित बैठक के लिए समय नहीं देता है। इसीलिए सीटू अब मीडिया के माध्यम से ही अस्पताल प्रबंधन से बात करना उचित समझा, जिसके तहत प्रबंधन से बात करने के बाद विभिन्न समाचार माध्यमों से सार्वजनिक किए जाने वाली बात को अब समाचार माध्यमों के द्वारा ही प्रबंधन तक बात पहुंचाई जा रही है।
प्रोस्टेट से जुड़ी बीमारी के इलाज हेतु दवाइयां नहीं मिल रही है सेक्टर 9 अस्पताल में
अस्पताल में अब इलाज के बाद फार्मेसी में दवाइयां ना मिलने की घटनाएं आम हो गई है। फार्मेसी में दवाइयां उपलब्ध न होने पर फार्मासिस्ट मेडिकल बुक में दवाई के आगे नॉट अवेलेबल लिख देते हैं और मरीज उसे दवाई को बाहर से खरीदने को मजबूर है।
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किंतु मेडिकल शॉप से दवाइयां खरीदने वाले सभी मरीज री-इंबर्समेंट के लिए आवेदन नहीं कर पाते हैं, क्योंकि री-इंबर्समेंट के लिए ई सहयोग में जाकर आवेदन करने की प्रक्रिया भी सरल नहीं है। वर्तमान समय में फार्मेसी के अंदर मिथाइल कोब्लामाइन, बी काम्प्लेक्स, न्यूरोबियान, मीरा, सिलोडाल जैसी सामान्य दवाइयां भी उपलब्ध नहीं है। पिछले दिनों कुछ ऐसी मेडिसिन उपलब्ध नहीं थी जो कि करोना के बाद अधिकांश मरीजों को इसकी आवश्यकता शुरू हो गई थी।
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एथिकल स्टील के हैप्पीनेस की धज्जियां उड़ा रहा है अस्पताल प्रबंधन
अस्पताल प्रबंधन कहीं ना कहीं नए ईडी वर्क्स के स्लोगन एथिकल स्टील की धज्जियां उड़ा रहा है, क्योंकि मरीज उचित इलाज एवं उसके पश्चात दवाइयों के नहीं मिलने से खुश कैसे रह सकते हैं। और यदि संयंत्र कर्मी एवं उसके परिजन स्वास्थ्य को लेकर मेडिकल डिपार्टमेंट से खुश नहीं रहेंगे तो उसका असर उत्पादन पर भी पड़ना स्वाभाविक है।