- सेफी चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर ने साल 2018-19 के 2 प्रतिशत इंक्रीमेंटल पीआरपी का मुद्दा उठाया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल (Steel Authority of India Limited) के अधिकारियों के ग्रेच्यटी, डीए और 2 प्रतिशत इंक्रीमेंटल पीआरपी पर लेटेस्ट अपडेट आ गया है। National Confederation of Officers Associations-NCOA पदाधिकारियों संग स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी (Steel Executive Federation of India-SEFI) चेयरमैन एनके बंछोर ने डीपीई अधिकारियों से मुलाकात की।
एनसीओए अध्यक्ष एमएस अडसुल, कार्यकारी अध्यक्ष एनके बंछोर और वीके तोमर ने आगामी चौथे पीआरसी प्रक्रिया में एनसीओए की भूमिका पर विस्तृत चर्चा के लिए डीपीई के संयुक्त सचिव से मुलाकात की। संयुक्त सचिव ने बताया कि आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) की अधिसूचना के तुरंत बाद, चौथे पीआरसी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
मीटिंग के दौरान सेफी चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर ने साल 2018-19 के 2 प्रतिशत इंक्रीमेंटल पीआरपी का मुद्दा उठाया। सेल प्रबंधन की ओर से अधिकारियों के बकाया पीआरपी के भुगतान के लिए डीपीई को प्रस्ताव भेजा गया, जिसको खारिज किया जा चुका है। इस पर सेफी चेयरमैन ने डीपीई के अधिकारियों से गंभीरतापूर्वक बिंदुवार चर्चा की।
शब्दों के खेल में पीआरपी फंसा
बैठक में यह बात भी सामने आई कि सरकार की ओर से जारी सर्कुलर में शब्दों की त्रुटि से आज तक अधिकारियों को नुकसान हो रहा है। शब्दों के खेल में ऑर्डर फंस गया है। सर्कुलर में प्रॉफिट वर्सेस प्रॉफिट लिखा है, जबकि पीबीटी वर्सेस पीबीटी होना चाहिए। यहां गलत लिख गया है। इसके कारण मामला फंस गया है।
हार्ड शिफ्ट एलाउंस का मुद्दा भी डीपीई की मीटिंग में उठा। किसी भी हालत में सभी पीएसयू में एक सामान लागू करने की मांग की गई। कोल और ओएनजीसी में लागू है। बाकी जगह अधिकारी वंचित हो रहे हैं। किसको-कितना हार्डशिप एलाउंस दिया जाए, इस पर भी मंथन किया गया।
माइंस के लिए डिफिकल्ट माइंस एलाउंस दीजिए
माइंस के लिए दासा बंद हो गया है। इसके बदले में डिफिकल्ट माइंस एलाउंस देने की मांग की गई है, ताकि कार्मिकों को अधिकार मिल सके। डीपीई के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के दौरान चौथे पीआरसी पर विस्तार से चर्चा की गई। अब सेफी और एनसीओए के तरफ से चौथे पीआरसी पर प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। चौथे पीआरसी के लिए क्या-क्या सुझाव हो सकते हैं, यह भी सभी इकाइयों से मांगे जाएंगे।
एलाउंस को कैसे फिक्स कर सकते हैं
खास बात यह है कि डीए बढ़ने पर एलाउंस को भी बदलने की मांग की गई है। महंगाई भत्ता बदलने पर एलाउंस को कैसे फिक्स कर सकते हैं। इस पर चर्चा की गई है। पूर्व में पे-रिवीजन कमेटी ने इस विषय पर प्रस्ताव दिया था, लेकिन सरकार ने नहीं माना था। इसी तरह महिलाओं को मिलने वाले चाइल्ड केयर सुविधा, दिव्यांग आदि पर सभी पीएसयू को निर्देशित करने की मांग की गई है, ताकि सभी कंपनियों में सुविधाओं का लाभ सबको मिल सके।











