बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर विवाद, SAIL की चार खदान में उत्पादन ठप। बायोमेट्रिक के विरोध में काम बंद। झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस में संकट।
- चार खदानों में हड़ताल से थमा उत्पादन, प्रबंधन-यूनियन आमने-सामने।
- ट्रिब्यूनल में मामला लंबित, फिर भी बायोमेट्रिक लागू; SAIL कर्मियों ने खोला मोर्चा।
सूचनाजी न्यूज, झारखंड। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल (Steel Authority of India Limited- SAIL) के झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस (Jharkhand Group of Mines) में हड़ताल चल रही है। किरीबुरु (Kiriburu), मेघाहतुबुरु (Meghahatuburu), गुआ (Gua) और चिरिया (Chiria) खदान में हड़ताल चल रही है। किरीबुरु, मेघाहातुबुरु, गुआ और चिरिया खदानों में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सोमवार को उत्पादन प्रभावित हो गया। 15 जून से बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य किए जाने के आदेश के विरोध में कर्मचारियों ने सोमवार सुबह 6 बजे से काम बंद कर दिया। इसके चलते सभी शिफ्टों में उत्पादन ठप हो गया है।
नियमित कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जबकि ठेका मजदूर काम पर बने हुए हैं। हड़ताल समाप्त कराने के लिए प्रबंधन और यूनियन नेताओं के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद तीसरे दौर की बैठक किरीबुरु ट्रेनिंग सेंटर में हो रही है। किरीबुरु (Kiriburu) माइंस के वर्क्स रिप्रेजेंटेटिव भी बैठक में शामिल हैं।
यूनियन नेताओं का कहना है कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस का मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। सुनवाई जारी रहने के बावजूद प्रबंधन ने एकतरफा निर्णय लेते हुए इसे अनिवार्य कर दिया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। विवाद सुलझाने के लिए प्रबंधन ने दोपहर एक बजे और फिर तीन बजे बैठक की, लेकिन दोनों ही बैठकें बेनतीजा रहीं।
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सभी यूनियनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। यूनियन पदाधिकारी और कर्मचारी टाइम ऑफिस के सामने धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे दुर्गम क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़कों, स्कूलों और अन्य लंबित मांगों की ओर प्रबंधन का ध्यान नहीं है। उनकी समस्याओं और मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों को स्पेशल सीएल का लाभ दिया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। उनका कहना है कि यह सुविधा कर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए।
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हड़ताल के दौरान प्रबंधन के साथ वार्ता में विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इनमें एटक से गुंजन कुमार, सचिन और राजकुमार प्रसाद, बीएमएस से अमित कुमार झा और संतोष पंडा, झारखंड मजदूर संघ से इंतखाब आलम और कामता प्रसाद, इंटक से दीपक राम और बीरबल गुड़िया, सीटू से निरंजन कुमार और पूर्ति, एचएमएस से धनीराम लकड़ा तथा अन्य यूनियनों की ओर से वीर सिंह मुंडा सहित कई पदाधिकारी शामिल रहे।
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