सेक्टर 9 अस्पताल में ग्रेड-1 सप्लाई के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी? इसकी जिम्मेदारी तय कर प्रबंधन तकनीकी जांच करे, ताकि व्यवस्था बेहतर बने।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। शुक्रवार को बदले मौसम और खराब बिजली व्यवस्था से आधा भिलाई टाउनशिप और सेक्टर 9 हॉस्पिटल अंधेरे में रहा। भिलाई के सेक्टर-9 अस्पताल में बिजली गुल होने से कैजुअल्टी सहित कई वार्डों में गंभीर स्थिति पैदा हो गई। अस्पताल जैसे अति संवेदनशील संस्थान में बिजली की निर्बाध आपूर्ति केवल सुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की जिंदगी से जुड़ी आवश्यकता है। बिजली बंद होने पर मरीजों की जांच, उपचार, दवाइयों की आपूर्ति तथा चिकित्सा उपकरणों का संचालन प्रभावित होता है। खासकर गंभीर मरीजों और बुजुर्गों के लिए ऐसी स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। कैजुअल्टी में अचानक बिजली चले जाना प्रबंधन की आपातकालीन तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रेड-1 बिजली आपूर्ति का उद्देश्य ही है-बाहर बिजली जाए, फिर भी अस्पताल रोशन रहे
सेक्टर-9 अस्पताल को ग्रेड-1 की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जाती है। इसका मूल उद्देश्य यही है कि सामान्य विद्युत व्यवस्था में कहीं भी व्यवधान आए, फिर भी अस्पताल की बिजली आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। इंसेंटिव केयर यूनिट में बिजली उपलब्ध रही क्योंकि वहां वेंटिलेटर सहित जीवनरक्षक उपकरणों पर मरीज रहते हैं और बैटरी बैकअप जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाती है। लेकिन कैजुअल्टी और अन्य वार्डों का अंधेरे में डूब जाना इस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अस्पताल में ग्रेड-1 सप्लाई के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी, इसकी जिम्मेदारी तय करते हुए प्रबंधन को तत्काल तकनीकी जांच करानी चाहिए।
मैनपॉवर की लगातार कमी का असर अब भी दिखने लगा है मूलभूत सुविधाओं पर
यह बात सामने आ रही है कि सुबह से ही तकनीकी परेशानी के कारण रुक-रुककर अस्पताल सहित कई सेक्टरों की बिजली प्रभावित हो रही है। व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी प्रबंधन की है, लेकिन लगातार घटते मैनपॉवर और नई भर्ती पर लगाए गए रोक के परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। जब कर्मचारियों की संख्या घटती जाएगी तो विद्युत, सिविल, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सेवाओं पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। समाचार लिखने जाने रात करीब 10 बजे तक इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट की टीम लोकल फाल्ट को खोजने में जुटी रही, ताकि विद्युत सप्लाई बहाल की जा सके।
मैनपॉवर कम करने की नीति का श्रेय केंद्रीय प्रबंधन और संबंधित मंत्रालय को जाता है, लेकिन इसका खामियाजा कर्मचारियों, मरीजों और आम नागरिकों को क्यों भुगते? प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अस्पताल की ग्रेड-1 विद्युत व्यवस्था किसी भी परिस्थिति में विफल न हो और वैकल्पिक बिजली व्यवस्था हर वार्ड तक तत्काल उपलब्ध रहे। समाचार लिखे जाने तक पॉवर सप्लाई बहाल नहीं हो सकी थी।

