किसी के हाथों में फूल। कोई माला पहनाकर सम्मान करता। कई बार सहकर्मी वाहन लेकर पहुंचते। अपने साथी को गेट से घर तक छोड़कर आते।
- साल 2024-25 में रेल मिल के कर्मचारियों के विदाई की खबर को सूचनाजी.कॉम ने प्रमुखता से प्रसारित किया था। तब से ग्राफ बढ़ता जा रहा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में हर माह अलग-अलग विभागों से अधिकारी और कर्मचारी अपनी लंबी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। लेकिन अब इनकी विदाई का अंदाज भी खास होता जा रहा है। ड्यूटी के अंतिम दिन जब सेवानिवृत्त कर्मचारी या अधिकारी प्लांट के गेट से बाहर निकलते हैं तो वहां परिवार, मित्र और वर्षों तक साथ काम करने वाले सहकर्मी उनका इंतजार करते मिलते हैं। स्वागत-अभिनंदन के बाद साथी उन्हें सम्मान के साथ घर तक छोड़कर आते हैं।
पिछले कुछ महीनों से भिलाई में यह दृश्य लगातार देखने को मिल रहा है। रिटायरमेंट के दिन गेट पर सहकर्मियों और परिजनों की मौजूदगी जैसे एक नई परंपरा का रूप लेती जा रही है। यह सिर्फ अपने साथी को विदाई देने की रस्म नहीं, बल्कि वर्षों तक साथ काम करने वाले कर्मचारी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का भाव भी है।
साल 2025 में रेल मिल के कर्मचारियों के विदाई की खबर को सूचनाजी.कॉम ने प्रमुखता से प्रसारित किया था। इसके बाद हर माह जश्न का दौर तेज होता दिख रहा है। हर माह सूचनाजी.कॉम भी हर बीएसपी के विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की खबरों को प्रमुखता से लोगों तक पहुंचाता रहा है। इन खबरों के जरिए केवल एक कर्मचारी के रिटायर होने की सूचना ही नहीं मिलती, बल्कि उन लोगों की वर्षों की सेवा, उपलब्धियों और सहकर्मियों के साथ बने रिश्तों की कहानी भी सामने आती है।
आखिरी दिन गेट पर खड़े मिलते हैं अपने
सेवानिवृत्ति के बाद जीवन की एक नई पारी शुरू होती है। लेकिन उससे पहले का वह पल बेहद भावुक होता है, जब कर्मचारी वर्षों तक जिस संयंत्र में अपनी सेवाएं देता रहा, उसी के गेट से आखिरी बार बाहर निकलता है। ऐसे में जब सामने परिवार के सदस्य, दोस्त और सहकर्मी स्वागत के लिए खड़े मिलते हैं तो सेवानिवृत्त कर्मी के लिए यह क्षण गर्व और भावुकता से भर जाता है।
किसी के हाथों में फूल होते हैं तो कोई माला पहनाकर सम्मान करता है। कई बार सहकर्मी वाहन लेकर पहुंचते हैं और अपने साथी को गेट से सीधे घर तक छोड़कर आते हैं। यह परंपरा इस बात का अहसास कराती है कि नौकरी भले खत्म हो गई हो, लेकिन वर्षों में बने रिश्ते खत्म नहीं होते।
रेल मिल के नानसाय भगत और दिनेश दुबे को दी भावुक विदाई
इसी कड़ी में रेल मिल से सेवानिवृत्त हुए नानसाय भगत और दिनेश दुबे के अंतिम कार्यदिवस पर सहकर्मी, परिजन और मित्र बंधु प्लांट गेट पर पहुंचे। दोनों का स्वागत और अभिनंदन किया गया। सहकर्मियों ने उन्हें सम्मान के साथ विदाई दी और घर तक साथ पहुंचाया।
नानसाय भगत के लिए उनके साथी जोगाराव ने भावपूर्ण पंक्तियां भी लिखीं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति केवल सेवा का समापन नहीं, बल्कि गौरवपूर्ण यात्रा का स्वर्णिम पड़ाव है। वर्षों तक अपने कर्तव्य, अनुशासन, निष्ठा और कर्मयोग से स्थापित किए गए आदर्श हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
उन्होंने लिखा कि भगत का समर्पण, सादगी और उच्च जीवन-मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। साथ ही उनके सुखद और आनंदमय सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका अनुभव, सीख और स्नेह हमेशा साथियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
ये खबर भी पढ़ें: सीजीएम साहब जल्द दिलवाइए नॉन फाइनेंशियल मोटिवेशन का गिफ्ट
यूनियन नेता कमलेश चोपड़ा भी रिटायर
रिटायर होने वालों में इंजीनियरिंग डिजाइन एंड ड्राइंग डिपार्टमेंट-ईडीडी के कर्मचारी कमलेश चोपड़ा का नाम भी शामिल है। साल 1987 से बीएसपी से जुड़े थे। अगस्त में रिटायर हो गए हैं। शुक्रवार शाम बीएसपी मेन गेट पर जब कमलेश चोपड़ा बाहर आए तो चाहने वाले और परिवार के सदस्य जुटे रहे। सीटू ठेका यूनियन के पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश चोपड़ा का स्वागत ढोल-नगाड़े से किया जा रहा था। इस दौरान योगेश सोनी, जमील अहमद, डीवीएस रेड्डी, वेंकट रघुराम, सेक्टर 9 हॉस्पिटल के अटेंडेंट आदि मौजूद रहे।
रिटायरमेंट के साथ एक रिश्ता और मजबूत हो रहा
भिलाई इस्पात संयंत्र में सेवानिवृत्ति समारोहों की अपनी एक अलग परंपरा रही है। अब गेट पर परिवार और सहकर्मियों का एकत्र होकर अपने साथी का स्वागत करना उस परंपरा को एक भावनात्मक रूप दे रहा है।
आखिरकार, सेवानिवृत्ति नौकरी का अंत जरूर है, लेकिन रिश्तों का नहीं। प्लांट के गेट पर खड़े अपने लोगों का स्वागत इस बात का खूबसूरत प्रमाण है कि वर्षों की मेहनत और साथ की यादें रिटायरमेंट के बाद भी कायम रहती हैं।
