चन्ना केशवलू गुट ने BMS कार्यकारिणी किया भंग, अरविंद गुट ने खोली पोल, कहा-संविधान में ठेका प्रकोष्ठ का जिक्र नहीं

  • प्रबंधन मान्यता प्राप्त यूनियन से सेफ्टी कमेटी के लिए सदस्यों के नाम मांगता है। इसलिए सेफ्टी कमेटी को भंग करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन के पास रहता है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात मजदूर संघ (BMS) की ओर से ठेका प्रकोष्ठ एवं सेफ्टी कमेटी भंग किए जाने की खबर आते ही एक बार फिर गुटबाजी की झलक दिख गई।

अरविंद पांडे गुट ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि भिलाई इस्पात मजदूर संघ के संविधान में कहीं भी एक ही रजिस्ट्रेशन पर ठेका प्रकोष्ठ चलाये जाने का उल्लेख नहीं है। इसलिए किसी भी प्रकार के ठेका प्रकोष्ठ को जब चलाया ही नहीं जा सकता, तब इसे भंग करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार का ठेका प्रकोष्ठ भिलाई इस्पात मजदूर संघ के नाम से चला रहा था तो निश्चित ही असंवैधानिक था।

Vansh Bahadur

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इसी प्रकार मान्यता प्राप्त यूनियन को सेफ्टी कमेटी भंग करने का कोई अधिकार नहीं होता है। सेफ्टी कमेटी हमेशा प्रबंधन के द्वारा बनाई जाती है, जिसमें अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहते हैं। प्रबंधन मान्यता प्राप्त यूनियन से सेफ्टी कमेटी के लिए सदस्यों के नाम मांगता है। इसलिए सेफ्टी कमेटी को भंग करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन के पास रहता है।

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कोर्ट में परिवाद दायर

अरविंद पांडेय का कहना है कि आज कर्मचारी भिलाई इस्पात मजदूर संघ के वर्तमान पदाधिकारीयों जिन्होंने गलत तरीके चुनाव कराकर मान्यता प्राप्त की है, जिसके विरुद्ध कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। इनसे कर्मचारी पूरी तरह निराश हो चुके है, जिस उम्मीद और आशा के साथ यूनियन को चुना उस पर पदाधिकारी पूरी तरह से असफल हो चुके हैं।

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कर्मचारियों की समस्याओं की भरमार

आज कर्मचारियों की समस्याओं की भरमार है। केंद्रीय मुद्दे हो या संयंत्र के छोटे बड़े मुद्दे कर्मचारियों की समझ में नहीं आ रहा की अपनी बात किसके सामने रखें।

कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाने के लिए सेक्टर 6 में एक यूनियन कार्यालय प्रबंधन से एलॉट करवा लिया। आज उसे भी किराए पर दे दिया गया है। इस संबंध में समय-समय पर प्रबंधन को अवगत कराया जा रहा है और उम्मीद है कि प्रबंधन इस पर जल्द ही संज्ञान लेगा।

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मामला स्टे के लिए न्यायालय में विचाराधीन

अरविंद पांडे ने प्रबंधन से अपील की है कि यूनियन के रजिस्ट्रेशन संबंधी मामला स्टे के लिए न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए किसी भी प्रकार की कमेटियों के पुनर्गठन पर संवैधानिक रूप से विचार कर निर्णय ले।

चन्ना केशवलू का आया पक्ष 

वहीं, इस मामले पर महामंत्री चन्ना केशवलू ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि बीएमएस में कोई गुटबाजी नहीं है। हम लोगों को रजिस्ट्रार ने पंजीकृत किया है। इसलिए अरविंद पांडेय का तमाम दावा गलत है। बीएमएस को अधिकार है कि कई प्रकोष्ठ को संचालित कर सकता है। बायलॉज के आधार पर ही काम किया जा रहा है।

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