संजय साहू बोले-बीएसपी संग सेल प्लांट में केंद्रीय मैनपॉवर सप्लाई एजेंसियों के शामिल होने से स्थानीय श्रमिकों के रोजगार पर संकट न पड़ने पाए।
- यदि स्थानीय श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं की गई और उनकी रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में अब तीन एजेंसी के जरिए मैनपॉवर सप्लाई होगी। Quess Corporation Ltd., Randstad India Pvt. Ltd. और Innovsource Services Pvt. Ltd. के माध्यम से ही हायर स्किल्ड, स्किल और अनस्किल्ड लेबर की भर्ती की जाएगी। तीन एजेंसी को इम्पैनल करने की खबर सूचनाजी.कॉम में सबसे पहले प्रसारित की गई। ‘Steel Authority of India Limited: मैनपावर सप्लाई करने 2 भारतीय, 1 नीदरलैंड की एजेंसी इम्पैनल, यहीं से होगी भर्ती’ शीर्षक से खबर आते ही प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई है।
स्टील ठेका श्रमिक संघ (इंटक) ने स्पष्ट रूप से मांग किया है कि कोई भी एजेंसी आए। लेकिन, हमारे स्थानीय बेरोजगार युवाओं को मौका मिलना चाहिए। जो मजदूर प्लांट में सेवा दे रहे हैं, उनकी छंटनी नहीं होनी चाहिए। मजदूरों को काम से नहीं निकालने देंगे। यहां भी शिक्षित कर्मचारी सेवा दे रहे हैं, इसलिए इन्हें पहले मौका दिया जाए।
अध्यक्ष संजय साहू का कहना है कि केंद्रीय मेनपॉवर सप्लाई एजेंसियों को सूचीबद्ध किए जाने के बाद स्थानीय श्रमिकों के परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। इस्पात मंत्रालय द्वारा क्वेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, रैंडस्टैड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं इनोवसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को विभिन्न संयंत्र इकाइयों में जनशक्ति उपलब्ध कराने के लिए अनुशंसित किया गया है। यदि इन एजेंसियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर भर्ती की जाती है तो स्थानीय क्षेत्रों के श्रमिकों को रोजगार से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए यूनियन की मांग है कि स्थानीय श्रमिकों की ही भर्ती की जाए।
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संजय साहू ने कहा कि भिलाई एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों कुशल एवं अकुशल श्रमिक वर्षों से बीएसपी और उससे जुड़े कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, फिटर, ऑपरेटर सहित विभिन्न तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि सूचीबद्ध एजेंसियां स्थानीय स्तर पर भर्ती करने के बजाय बाहरी श्रमिकों को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे स्थानीय युवाओं एवं श्रमिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे।
उन्होंने कहा कि एसएमएस-3 एवं ब्लास्ट फर्नेस-8 जैसी इकाइयों में पहले से ही बाहरी श्रमिकों की तैनाती के उदाहरण सामने आए हैं। यदि यही व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू होती है तो दशकों से कार्य कर रहे स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह केवल ठेकों का विषय नहीं बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का प्रश्न है।
संजय साहू ने यह भी कहा कि बीएसपी में नियमित कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति होने से भविष्य में कर्मचारियों की संख्या और कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में यदि नई जनशक्ति की आवश्यकता इन एजेंसियों के माध्यम से पूरी की गई तो स्थानीय श्रमिकों की नौकरी और रोजगार के अवसरों पर अतिरिक्त संकट उत्पन्न हो सकता है।
स्टील ठेका श्रमिक यूनियन इंटक ने इस्पात मंत्रालय एवं भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से मांग की है कि एजेंसी अनुबंधों में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता एवं न्यूनतम निर्धारित प्रतिशत में स्थानीय भर्ती की गारंटी सुनिश्चित की जाए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय श्रमिकों के हितों की रक्षा नहीं की गई और उनकी रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो यूनियन व्यापक आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी।

