59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का SAIL-Bhilai Steel Plant ने किया सम्मान

Vinod Kumar Shukla, awarded with the 59th Gyanpeeth Award, was honored by SAIL-Bhilai Steel Plant
विनोद कुमार शुक्ल को वर्ष 2024 के लिए भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत किया गया।
  • शुक्ल की रचनाएं अपनी सादगी, गहन संवेदनशीलता और विशिष्ट कथाशैली के लिए जानी जाती हैं।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र (SAIL – Bhilai Steel Plant) द्वारा 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात हिंदी साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का उनके रायपुर स्थित निवास पर सम्मान किया गया।

ये खबर भी पढ़ें: बोकारो स्टील प्लांट के जीएम से जूनियर मैनेजर तक 8 अधिकारियों का ट्रांसफर

इस अवसर पर सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र (SAIL – Bhilai Steel Plant) के निदेशक प्रभारी अनिर्बान दासगुप्ता की ओर से महाप्रबंधक (सम्पर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने विनोद कुमार शुक्ल को सम्मानित किया। उनके साथ महाप्रबंधक (सम्पर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) एवं प्रभारी (राजभाषा) सौमिक डे तथा सहायक महाप्रबंधक (जनसंपर्क) जवाहर बाजपेयी भी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने श्री शुक्ल को शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ल के पुत्र, शाश्वत गोपाल शुक्ल भी उपस्थित थे।

ये खबर भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant: भिलाई में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अंबिकापुर मॉडल अपनाने की जरूरत

मार्च 2025 में विनोद कुमार शुक्ल को वर्ष 2024 के लिए भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत किया गया। यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले वे छत्तीसगढ़ राज्य के पहले साहित्यकार हैं। वर्ष 1961 में स्थापित यह पुरस्कार भारतीय साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।

ये खबर भी पढ़ें: भिलाई महिला समाज की नई कार्यकारिणी गठित, इन्हें मिली जिम्मेदारी

सम्मान समारोह के दौरान श्री शुक्ल ने संयंत्र के अधिकारियों से आत्मीय बातचीत करते हुए अपने साहित्यिक जीवन और अनुभवों को साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ा पुरस्कार है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार प्राप्त होगा।”

ये खबर भी पढ़ें: भिलाई इस्पात संयंत्र: बार और रॉड मिल का प्रोडक्शन 1.0 मिलियन टन पार, कटा केक

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में वर्ष 1937 में हुआ था। हिंदी साहित्य में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनकी साहित्यिक यात्रा 1971 में प्रकाशित कविता संग्रह “लगभग जय हिंद” से आरंभ हुई।

ये खबर भी पढ़ें: SAIL BSP: वित्तीय वर्ष में बेहतरीन रिजल्ट, भिलाई स्टील प्लांट के सभी ईडी एक साथ पहुंचे बधाई देने

उन्हें व्यापक ख्याति उपन्यास “नौकर की कमीज़” (1979) से प्राप्त हुई, जिस पर सुप्रसिद्ध फिल्मकार मणि कौल ने फिल्म भी बनाई। वर्ष 1997 में प्रकाशित उपन्यास “दीवार में एक खिड़की रहती थी”  के लिए उन्हें 1999 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

ये खबर भी पढ़ें: राउरकेला इस्पात संयंत्र: न्यू प्लेट मिल ने जीती वित्त वर्ष 2024-25 की चैंपियन ट्रॉफी

शुक्ल की रचनाएं अपनी सादगी, गहन संवेदनशीलता और विशिष्ट कथाशैली के लिए जानी जाती हैं। उनके लेखन में जादुई यथार्थवाद की झलक मिलती है, जो सामान्य जीवन की जटिलताओं को सहजता से प्रस्तुत करता है।

ये खबर भी पढ़ें: गर्मी और लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी, लू लगने पर तुरंत ये करें