9 जुलाई को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने जमानत को मंजूरी दे दी है। सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।
- कोर्ट ने ध्यान में रखा कि इसी मामले के एक सह-आरोपी को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इस आधार पर जीएम को पैरिटी (समानता) का लाभ देते हुए हाईकोर्ट ने जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के गिरफ्तार जीएम हिमांशु भूषण मलिक को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने 10 अगस्त को जमानत आवेदन मंजूर करते हुए दो स्थानीय जमानतदारों के साथ निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। बिलासपुर हाईकोर्ट का फैसला शाम तक हुआ। इसलिए आज जेल से रिहाई नहीं हो सकी। मंगलवार को बीएसपी के जनरल मैनेजर-जीएम हिमांशु मलिक जेल से बाहर आ जाएंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे जारी रहेगी। बीएसपी से स्क्रैप चोरी के मामले में पकड़े गए कई आरोपियों से पूछताछ के बाद दुर्ग पुलिस ने जीएम को भी गिरफ्तार किया था।
बचाव पक्ष की दलील
आवेदक की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि हिमांशु भूषण मल्लिक को मामले में झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई स्वतंत्र प्रथमदृष्टया साक्ष्य नहीं है। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपी का नाम एफआईआर में नहीं था और उसके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से सह-आरोपी के मेमोरेण्डम बयान पर आधारित हैं। यह भी कहा गया कि आरोपी की भूमिका केवल स्क्रैपयार्ड की निगरानी तक सीमित थी तथा परिसर की सुरक्षा CISF के जिम्मे थी।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा था और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुआ। गिरफ्तारी से जुड़े अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों के पालन को लेकर भी आपत्ति उठाई गई।
कोर्ट ने इन आधारों पर दी जमानत
राज्य की ओर से जमानत आवेदन का विरोध किया गया। हालांकि, कोर्ट ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं है और मामले में चार्जशीट सक्षम न्यायालय के समक्ष दाखिल की जा चुकी है। जीएम हिमांशु मलिक को 9 जुलाई 2026 को अरेस्ट किया गया था। पूरे एक माह वह जेल से बाहर आ रहे हैं।
कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि इसी मामले के एक सह-आरोपी को 4 अगस्त 2026 के आदेश से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इस आधार पर आरोपी को पैरिटी (समानता) का लाभ देने के साथ कोर्ट ने माना कि ट्रायल पूरा होने में समय लगने की संभावना है। इसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत आवेदन स्वीकार कर लिया।
जमानत के साथ कई शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए जीएम को निर्देश दिया कि गवाहों की मौजूदगी में तय साक्ष्य की तारीखों पर अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं की जाएगी। आरोपी को ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक निर्धारित तारीख पर व्यक्तिगत रूप से या अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित रहना होगा।
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इसके अलावा, केस की शुरुआत, आरोप तय किए जाने और BNSS की धारा 351 के तहत बयान दर्ज किए जाने के दौरान आरोपी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहना होगा। जमानत की शर्तों का उल्लंघन या ट्रायल के दौरान जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग होने पर ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

