रेल रोको, रास्ता रोको, कार्यस्थल पर विरोध, मांगों के बैज और मानव श्रृंखला जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- मजदूर-किसान राष्ट्रीय सम्मेलन का ऐलान: एकजुट संघर्ष को तेज करने का संकल्प। मजदूर-किसान एकता समय की सबसे बड़ी जरूरत।
- भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए देशभर में जिला स्तर और राज्यों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, विभिन्न सेक्टरों के फेडरेशन एवं एसोसिएशनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर मजदूरों और किसानों का दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन ने देश की मौजूदा आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए मजदूर-किसान एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया। सम्मेलन ने कहा कि देश की इन दो प्रमुख उत्पादक शक्तियों की एकजुटता ही जनविरोधी नीतियों के खिलाफ निर्णायक संघर्ष को आगे बढ़ा सकती है।
लेबर कोड और निजीकरण के खिलाफ संघर्ष
सम्मेलन ने चार लेबर कोड और उनसे जुड़े नियमों को मजदूरों के अधिकारों पर बड़ा हमला बताया। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों से यूनियन बनाने, पंजीकरण, सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसे अधिकार कमजोर होंगे। फिक्स्ड टर्म और ठेका रोजगार को बढ़ावा देकर स्थायी रोजगार को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सम्मेलन ने सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों और रेलवे, बैंक, बीमा, बिजली, कोयला, स्टील, बंदरगाह, परिवहन एवं अन्य सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण और विनिवेश का विरोध किया तथा एनएमपी 2.0 और आउटसोर्सिंग पर रोक की मांग की।
किसानों की मांगों और कृषि संकट पर जोर
सम्मेलन ने किसानों से किए गए वादों को पूरा न किए जाने पर नाराजगी जताई। किसानों के लिए सभी फसलों पर सी2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी गारंटी वाला एमएसपी, व्यापक कर्जमाफी और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन कानून 2013 को सख्ती से लागू करने की मांग की गई। सम्मेलन ने मनरेगा को मजबूत करने, 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने तथा कृषि को उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से आधुनिक बनाने की मांग उठाई।
रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
सम्मेलन ने बढ़ती बेरोजगारी, सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर चिंता जताई। स्वीकृत पदों पर तत्काल भर्ती, नए रोजगार सृजन और सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग की गई। सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाने, पेपर लीक की जवाबदेही तय करने तथा स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की मांग भी प्रमुख रही। न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सभी के लिए सार्वभौमिक पेंशन की मांग रखी गई।
10 अगस्त से देशव्यापी संघर्ष का ऐलान
सम्मेलन ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का संकल्प लेते हुए 10 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए देशभर में जिला स्तर और राज्यों की राजधानियों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया। रेल रोको, रास्ता रोको, कार्यस्थल पर विरोध, मांगों के बैज और मानव श्रृंखला जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही राज्यों में संयुक्त बैठकें और सम्मेलन, बहुदिवसीय विकेंद्रीकृत महापड़ाव तथा आवश्यकता पड़ने पर देशव्यापी बहुदिवसीय आंदोलन और सीधी कार्रवाई की तैयारी की जाएगी।
मजदूर-किसान सम्मेलन ने देश की जनता से आह्वान किया कि समानता, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों तथा जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को व्यापक और निर्णायक बनाएं।

