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SAIL New Lease Policy 2026: भिलाई, BSL, RSP, ISP, DSP, BSL टाउनशिप में 15 मई से नया नियम लागू, पढ़ें गाइडलाइन-कैलकुलेशन

Azmat ali 08/06/2026 1 minute read
SAIL New Lease Policy 2026 Policy Guidelines for Renewal of Lease Sub-Lease of Lands Allotted to Government Outside Agencies

स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था या ट्रस्ट के 5 वर्षों में औसतन 50 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय पर ये नियम।

  • सेल की नई लीज नीति लागू। मंदिर-मस्जिद को ₹1 में नवीनीकरण। दुकानों पर 25% प्रीमियम, एक साल की आम माफी भी।
  • धार्मिक संस्थाओं के लिए ₹1 में नवीनीकरण, लेकिन अन्य शुल्क रहेंगे। सिक्योरिटी डिपॉजिट, वार्षिक ग्राउंड रेंट, सर्विस चार्ज देना होगा।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई/नई दिल्ली। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) ने 15 मई 2026 से भूमि लीज और सब-लीज नवीनीकरण के लिए नई नीति लागू कर दी है। इस नीति से भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर, इस्को स्टील प्लांट बर्नपुर और सेल की अन्य टाउनशिप में संचालित हजारों दुकानदारों, स्कूलों, कॉलेजों, बैंकों, सरकारी संस्थानों, धार्मिक स्थलों, सामाजिक संगठनों और लीजधारकों को सीधा लाभ या प्रभाव पड़ेगा। वहीं, हाउस लीज को लेकर चैंबर ने जो दावा किया था, उसकी सच्चाई भी सामने आ गई है। Employee housing यानी Co-operative society को राहत दी गई है।

सबसे बड़ी राहत धार्मिक, सामाजिक और चैरिटेबल संस्थाओं को मिली है। नई नीति के तहत मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, श्मशान, कब्रिस्तान, महिला समितियों, कर्मचारी संघों तथा कई चैरिटेबल संस्थाओं का लीज नवीनीकरण मात्र एक रुपये टोकन राशि में किया जाएगा।

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विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे महत्वपूर्ण चरण स्थानीय स्तर पर नीति का क्रियान्वयन होगा। यदि संयंत्र प्रबंधन समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करता है तो वर्षों से अटके लीज नवीनीकरण मामलों का समाधान संभव हो सकेगा और सेल को भी लंबित राजस्व की प्राप्ति होगी।

आखिर क्यों लाई गई नई नीति

सेल के विभिन्न संयंत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी लीज थीं, जिनकी अवधि वर्षों पहले समाप्त हो चुकी थी। पुरानी नीति के कारण लीज नवीनीकरण, प्रीमियम, ब्याज और अन्य शुल्कों को लेकर विवाद चल रहे थे। कई मामलों में बकाया राशि इतनी बढ़ गई थी कि संस्थाएं और लीजधारी भुगतान करने की स्थिति में नहीं थे। नई नीति का उद्देश्य पूरे सेल में एक समान व्यवस्था लागू करना, पुराने मामलों का समाधान करना और राजस्व वसूली की प्रक्रिया को सरल बनाना है।

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किन पर लागू होगी नई नीति

नई नीति केवल पुरानी लीज और सब-लीज के नवीनीकरण पर लागू होगी। इसमें…
जिनकी लीज 15 मई 2026 से पहले समाप्त हो चुकी है।
जिनकी लीज भविष्य में समाप्त होने वाली है।
यह नीति नई लीज आवंटन पर लागू नहीं होगी।
तीन श्रेणियों में बांटा गया पूरा ढांचा

सेल ने सभी लीजधारकों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया

श्रेणी-1: व्यावसायिक संस्थान
निजी दुकानें
दुकान-सह-आवास
पेट्रोल पंप
सिनेमा हॉल
बैंक
एटीएम
बीमा कंपनियां
केंद्रीय और राज्य सार्वजनिक उपक्रम

ये खबर भी पढ़ें: Vizag Steel Plant: RINL में भीषण हादसा, झुलसे 15 कर्मचारी, 10 की मौत, 5 जिंदगी और मौत से जूझ रहे

श्रेणी-2: सरकारी एवं गैर-व्यावसायिक संस्थान

आयकर विभाग
ईएसआईसी
सीआईएसएफ
डाकघर
जिला प्रशासन
पुलिस विभाग
नगर निगम
कर्मचारी सहकारी आवास समितियां
स्कूल
कॉलेज
शैक्षणिक संस्थान
आईसीएआई, आईसीएमएआई जैसे पेशेवर संगठन

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श्रेणी-3: धार्मिक, सामाजिक और चैरिटेबल संस्थान

मंदिर
मस्जिद
चर्च
गुरुद्वारा
श्मशान घाट
कब्रिस्तान
रामकृष्ण मिशन
ब्रह्माकुमारी
अरविंद सोसायटी
सार्वजनिक पुस्तकालय
चैरिटेबल स्कूल
चैरिटेबल अस्पताल
दिव्यांग विद्यालय
महिला समितियां
कर्मचारी संगठन

ये खबर भी पढ़ें: SAIL Board Decision 2026: मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च का लीज नवीनीकरण सिर्फ ₹1 में, हाउस लीज का 10%, व्यापारियों का 25%

किसे कितना देना होगा?

व्यावसायिक संस्थान
दुकानदारों और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को भूमि के वर्तमान मूल्य (Land Premium) का 25 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा।

सरकारी एवं शैक्षणिक संस्थान
इन संस्थाओं को भूमि मूल्य का 10 प्रतिशत नवीनीकरण शुल्क देना होगा।

धार्मिक और सामाजिक संस्थान
इन संस्थाओं को सिर्फ ₹1 टोकन राशि देकर लीज नवीनीकरण कराया जा सकेगा। यही वह प्रावधान है जिसे भिलाई और अन्य टाउनशिप की धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

₹1 में नवीनीकरण, लेकिन अन्य शुल्क रहेंगे
हालांकि केवल नवीनीकरण शुल्क ₹1 होगा।
धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं को भी निम्न शुल्क देने होंगे जैसे
सिक्योरिटी डिपॉजिट
वार्षिक ग्राउंड रेंट
सर्विस चार्ज

ये खबर भी पढ़ें: युद्ध के बीच इज़राइल में नौकरी का मौका, 3500 पदों पर भर्ती, करीब 2 लाख तक सैलरी

ये शुल्क श्रेणी-2 के समान दरों पर लागू होंगे

  • सिक्योरिटी डिपॉजिट कितना लगेगा? नई नीति के अनुसार
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट = (वार्षिक ग्राउंड रेंट + सर्विस चार्ज) × 3
  • यह एक बार जमा करना होगा और इस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।

हर साल देना होगा ग्राउंड रेंट

लीज नवीनीकरण के बाद
वार्षिक ग्राउंड रेंट = नवीनीकरण शुल्क का 1%
हर 5 वर्ष में 10% वृद्धि
सर्विस चार्ज भी देना होगा
वार्षिक सर्विस चार्ज = नवीनीकरण शुल्क का 2%
हर 5 वर्ष में 10% वृद्धि

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स्कूल-कॉलेज और बड़े ट्रस्ट पर भी नजर

नई नीति में एक महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है। यदि कोई स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्था या ट्रस्ट पिछले 5 वर्षों में औसतन 50 लाख रुपये या उससे अधिक वार्षिक आय अर्जित कर रहा है और उसकी आय उसके खर्च से 15% अधिक है, तो उसे अगली उच्च श्रेणी के अनुसार शुल्क देना पड़ सकता है। इसकी समीक्षा हर पांच वर्ष में होगी।

खाली जमीन रखने वालों के लिए राहत
यदि किसी संस्था को बड़ी जमीन आवंटित की गई है लेकिन निर्माण 50% से कम क्षेत्र में हुआ है, तो उसे पूरी जमीन का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी।
ऐसी स्थिति में निर्मित क्षेत्र के 1.5 गुना हिस्से पर नियमित शुल्क लगेगा।
शेष जमीन पर “राइट टू यूज” मिलेगा।
उस पर केवल वार्षिक ग्राउंड रेंट और सर्विस चार्ज देना होगा।
पुराने मामलों के लिए आम माफी योजना

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नई नीति की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेल ने एक प्रकार की वन-टाइम एमनेस्टी (आम माफी) योजना दी है।
यदि एक वर्ष के भीतर नवीनीकरण करा लिया
केवल नवीनीकरण शुल्क पर SBI कैश क्रेडिट दर से साधारण ब्याज लगेगा।
कोई दंडात्मक ब्याज नहीं लगेगा।
पुराने बकाए पर पेनल्टी माफ होगी।

यदि एक वर्ष बाद नवीनीकरण कराया
12% वार्षिक दंडात्मक ब्याज देना होगा।

लीज नहीं कराई तो क्या होगा? यदि कोई लीजधारी…
आवेदन नहीं करता
शुल्क जमा नहीं करता
नोटिस का जवाब नहीं देता
तो उसे अनधिकृत कब्जाधारी (Unauthorized Occupant) माना जाएगा। इसके बाद सेल…
लीज समाप्त कर सकती है
बेदखली की कार्रवाई कर सकती है
बकाया वसूली कर सकती है
क्षतिपूर्ति वसूल सकती है
स्थानीय स्तर पर होगी जांच

प्रत्येक संयंत्र में तीन सीजीएम स्तर के अधिकारियों की एक स्थायी समिति बनाई जाएगी। यह समिति तय करेगी
संस्था किस श्रेणी में आती है
जमीन का वास्तविक उपयोग क्या है
श्रेणी बदलनी है या नहीं

अंतिम स्वीकृति संबंधित फंक्शनल डायरेक्टर देंगे।

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भिलाई, बोकारो और राउरकेला में सबसे ज्यादा असर
इस नीति का सबसे अधिक प्रभाव उन टाउनशिप क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां वर्षों से लीज नवीनीकरण के मामले लंबित हैं। भिलाई स्टील प्लांट, बोकारो स्टील प्लांट और राउरकेला स्टील प्लांट क्षेत्रों में सैकड़ों दुकानें, धार्मिक स्थल, स्कूल और सामाजिक संस्थाएं इस नीति के दायरे में आएंगी।

क्या है सबसे बड़ी राहत?
नई नीति का सबसे बड़ा लाभ यह माना जा रहा है कि धार्मिक संस्थाओं का नवीनीकरण ₹1 में होगा।
वर्षों से चल रहा ब्याज और दंडात्मक विवाद समाप्त होने का रास्ता खुलेगा।
एक साल की राहत अवधि मिलेगी।
पुराने लंबित मामलों के समाधान का अवसर मिलेगा।
दुकानदारों, संस्थाओं और सेल प्रबंधन के बीच चल रहे कई विवाद सुलझ सकते हैं।

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