किसी अप्रिय हालात से निपटने के लिए पुलिस बल भी तैनात है। इस्पात भवन चौक के पास सीआइएसएफ जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। केंद्र की मोदी सरकार और सेल प्रबंधन के खिलाफ भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारी सड़क पर उतर गए। सोमवार शाम को मुर्गा चौक पर संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मजदूर सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। बकाया एरियर, सेक्टर 9 हॉस्पिटल के निजीकरण, मजदूरों की छंटनी, शोषण आदि को लेकर गुस्सा नारों में दिख रहा है। मुर्गा चौक से सेक्टर 9 हॉस्पिटल जाने वाला मार्ग जाम कर दिया गया है। एक तरफ का रास्ता रोक दिया गया है। किसी अप्रिय हालात से निपटने के लिए पुलिस बल भी तैनात है। इस्पात भवन चौक के पास सीआइएसएफ जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTU), क्षेत्रीय महासंघों एवं संघों और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के संयुक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूरों और किसानों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है। इसी कड़ी में 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। यह कार्यक्रम भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
देशभर में जिला और राज्य स्तर पर प्रदर्शन, रेल रोको, रास्ता रोको, कार्यस्थल पर विरोध प्रदर्शन, मानव श्रृंखला और शांतिपूर्ण जन लामबंदी के अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे। भिलाई में शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया जा रहा। सेक्टर 9 हॉस्पिटल तक रैली भी निकालने की तैयारी है।
लेबर कोड और निजीकरण के खिलाफ संघर्ष
चार लेबर कोड और उनसे जुड़े नियमों को मजदूरों के अधिकारों पर बड़ा हमला बताया। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों से यूनियन बनाने, पंजीकरण, सामूहिक सौदेबाजी, हड़ताल और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसे अधिकार कमजोर होंगे। फिक्स्ड टर्म और ठेका रोजगार को बढ़ावा देकर स्थायी रोजगार को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सम्मेलन ने सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों और रेलवे, बैंक, बीमा, बिजली, कोयला, स्टील, बंदरगाह, परिवहन एवं अन्य सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण और विनिवेश का विरोध किया तथा एनएमपी 2.0 और आउटसोर्सिंग पर रोक की मांग की।
किसानों की मांगों और कृषि संकट पर जोर
किसानों से किए गए वादों को पूरा न किए जाने पर नाराजगी जताई। किसानों के लिए सभी फसलों पर सी2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी गारंटी वाला एमएसपी, व्यापक कर्जमाफी और भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन कानून 2013 को सख्ती से लागू करने की मांग की गई। सम्मेलन ने मनरेगा को मजबूत करने, 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने तथा कृषि को उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से आधुनिक बनाने की मांग उठाई।
रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
बढ़ती बेरोजगारी, सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार पर चिंता जताई। स्वीकृत पदों पर तत्काल भर्ती, नए रोजगार सृजन और सभी श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की मांग की गई। सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बजट बढ़ाने, पेपर लीक की जवाबदेही तय करने तथा स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की मांग भी प्रमुख रही। न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सभी के लिए सार्वभौमिक पेंशन की मांग रखी गई।

