जब कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के वेतन, व्यावसायिक सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, AWA बंद करने का निर्णय औद्योगिक माहौल के लिए ठीक नहीं।
- SWFI ने आशंका जताई है कि AWA बंद करने का फैसला कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के बीच गंभीर असंतोष पैदा कर सकता है।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों को मिलने वाले Additional Welfare Amenities (AWA) पर संकट गहरा गया है। सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (CMO) की ओर से 15 जुलाई 2026 को जारी इंटर ऑफिस मेमो के जरिए कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को दिए जा रहे संशोधित AWA का भुगतान रोकने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सेल के डायरेक्टर (पर्सनल) केके सिंह को पत्र लिखकर इस आदेश को तत्काल वापस लेने और AWA का भुगतान बहाल करने की मांग की है।
फेडरेशन के अध्यक्ष तपन सेन और महासचिव ललित मोहन मिश्रा की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सेल में पिछले कुछ वर्षों में कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उत्पादन और सेवा गतिविधियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। संगठन ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स अब स्टील उद्योग का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
आंदोलन के बाद मिला था AWA
फेडरेशन ने पत्र में AWA के इतिहास का भी उल्लेख किया है। संगठन के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के मुद्दों को लेकर लंबे समय तक चले आंदोलन और विभिन्न SAIL एवं RINL इकाइयों में संघर्ष के बाद NJCS ने वर्ष 2009 में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के लिए पहली सब-कमेटी गठित की थी।
इस सब-कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सेल की विभिन्न इकाइयों में कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों को Additional Welfare Amenities की सुविधा शुरू की गई थी। इसके बाद वर्ष 2012 में दूसरी सब-कमेटी गठित हुई और जुलाई 2014 में AWA में बढ़ोतरी पर सहमति बनी। इसके परिणामस्वरूप सेल की इकाइयों में कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों को अलग-अलग स्तर पर AWA का भुगतान किया जाने लगा।
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66,390 कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के AWA में हुआ था संशोधन
NJCS की तीसरी सब-कमेटी ने 21 दिसंबर 2021 से कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू की थी। बातचीत के दौरान कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन और स्पष्ट वेतन संरचना की मांग भी उठाई गई। लंबी चर्चा के बाद 8 फरवरी 2024 को लगभग 66,390 कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के AWA में संशोधन पर सहमति बनी। प्रबंधन और पांच केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते के तहत AWA को न्यूनतम ₹2,600 से अधिकतम ₹4,100 तक संशोधित किया गया था। यह व्यवस्था मार्च 2024 से प्रभावी हुई थी।
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CMO के आदेश पर यूनियन नाराज
फेडरेशन ने कहा है कि 26 फरवरी 2024 का इंटर ऑफिस मेमो NJCS कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स सब-कमेटी में प्रबंधन और ट्रेड यूनियनों के बीच बनी सहमति को लागू करने के लिए जारी किया गया था। संगठन का दावा है कि AWA का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के न्यूनतम वेतन से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह NJCS के तहत सामूहिक बातचीत और आपसी समझौते से मिला कल्याणकारी लाभ है।
फेडरेशन ने CMO की ओर से 15 जुलाई 2026 को AWA रोकने के निर्देश पर कड़ा विरोध जताया है। पत्र में इस फैसले को एकतरफा बताते हुए कहा गया है कि इससे NJCS के तहत हुए समझौते और सामूहिक सौदेबाजी की भावना प्रभावित होती है।
AWA बंद हुआ तो बढ़ सकता है मजदूरों में असंतोष
संगठन ने आशंका जताई है कि AWA बंद करने का फैसला कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के बीच गंभीर असंतोष पैदा कर सकता है। फेडरेशन के अनुसार, ऐसे समय में जब कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, AWA बंद करने का निर्णय औद्योगिक माहौल के लिए ठीक नहीं होगा।
फेडरेशन ने सेल के डायरेक्टर (पर्सनल) से 15 जुलाई 2026 के इंटर ऑफिस मेमो को तत्काल वापस लेने, NJCS की द्विपक्षीय सहमति के अनुसार AWA का भुगतान बहाल करने और मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि AWA की बहाली से सामूहिक सौदेबाजी की भावना मजबूत होगी और सेल की विभिन्न इकाइयों में औद्योगिक शांति एवं सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अब निगाहें सेल प्रबंधन के अगले कदम पर
CMO में AWA भुगतान रोकने के आदेश के बाद अब कॉन्ट्रैक्ट मजदूरों की नजर सेल प्रबंधन के फैसले पर है। एक तरफ यूनियन NJCS में बनी सहमति का हवाला देते हुए आदेश वापस लेने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर CMO के स्तर पर AWA रोकने का निर्देश जारी किया जा चुका है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेल प्रबंधन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है।

