46 दिन तक मरच्यूरी में पड़ी रही लाश का मामला हल कराए। रिकॉर्ड समय में राष्ट्रीय स्तर की 'हाफ मैराथन' कराने में सफल रहे।
- भिलाई स्टील प्लांट महाप्रबंधक प्रभारी HR जेएन ठाकुर की 36 साल की सेवा समाप्त।
- नॉन-एग्जीक्यूटिव्स परफॉर्मेंस अप्रैजल (NPA) को नई दिशा में लागू कराने का श्रेय भी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के महाप्रबंधक प्रभारी HR जेएन ठाकुर रिटायर हो गए। बतौर कर्मचारी बीएसपी से साल 1990 में जुड़े। इसके बाद एमटीए के जरिए अधिकारी बने। फिर इतिहास रचने का सिलसिला शुरू हुआ। शुक्रवार को 36 साल की सेवा पूरी होने से पहले भी एक इतिहास रच गए। ठेका मजदूरों के शोषण को रोकने के लिए ठेकेदारों पर ऐसा नकेल कसने का इंतजाम कर गए कि आने वाले समय में मजदूरों को पूरा पेमेंट मिलने का रास्ता साफ हो गया।
एस्क्रो आधारित डिजिटल वेतन भुगतान प्रणाली के लिए पंजाब नेशनल बैंक-पीएनबी के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर कर गए। शाम 5.45 बजे जैसे ही सेवा समाप्त हुई। 100 से ज्यादा अधिकारी गेट तक छोड़ने के लिए आए। पत्नी, बेटी, दामाद के साथ चाहने वाले भी पहुंचे। जिस तरह से डीआइसी को विदाई दी जाती है, उसी पैटर्न पर खुली जीप में उन्हें सवार कराया गया।

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एचआर के अधिकारी गाड़ी को धकेलते हुए मेन गेट तक ले गए। फूलों की माला से भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद जब नेहरू नगर स्थित आवास पर पहुंचे तो वहां भाई ने ढोल-नगाड़े से स्वागत किया। मां ने बेटे का स्वागत किया। वहीं, भाई ने घर के कामकाज की कमान भी सौंप दी। इस्पात भवन से निकलने से पहले डीआइसी सीआर महापात्रा, ईडी एचआर पवन कुमार, पूर्व सीजीएम एचआर निशा सोनी, संदीप माथुर का आभार जता गए।

विवाद और मुश्किल समय में जेएन ठाकुर ही आए नज़र
जेएन ठाकुर इकलौते ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने 3 बार जवाहर अवार्ड जीता है। अब तक किसी के नाम यह रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही 16 बार जवाहर लाल नेहरू अवॉर्ड समारोह का संचालन भी कर चुके हैं। जेएन ठाकुर के योगदान की बात की जाए तो विवादों से कंपनी को बाहर निकालने में खास भूमिका निभाई है। राजहरा में कर्मचारी की मौत के बाद 46 दिन तक शव मरच्यूरी में पड़ा रहा। हालात बिगड़ते जा रहे थे। परिवार से सहमति नहीं बन पा रही थी। छत्तीसगढ़ी बोलने में माहिर जेएन ठाकुर ने नियम और कानून की बात को देसी अंदाज में समझाकर मामले को हल कराए।
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इसी तरह बीएसपी में सड़क हादसे में मजदूर की मौत पर परिवार वालों ने इस्पात और मेन गेट को घेर लिया था। प्रबंधन के हाथ-पैर फुलने लगे थे। सीआइएसएफ भीड़ रोक न सकी थी। जेएन ठाकुर उसी भीड़ में घुसे और परिवार वालों को समझाकर रास्ता एक घंटे में ही फ्री करा लिए।
इसी तरह राजहरा टाउनशिप में मिट्टी धंसने से 3 मजदूरों की मौत से भड़के गुस्से को भी शांत कराने में सबसे आगे रहे। हादसे के अगले दिन ही चेयरमैन डाक्टर अशोक कुमार पंडा का दौरा था। सीएमडी ने खुद जेएन ठाकुर को फोन कर राजहरा पहुंचने की बात कही थी। इस मामले को भी आसानी से हल कराने में कामयाबी मिली थी।

मन विचित्र भावुकता और असीम कृतज्ञता से भरा-जेएन ठाकुर
रिटायरमेंट के बाद जेएन ठाकुर बोले-आज मन विचित्र भावुकता और असीम कृतज्ञता से भरा हुआ है। वर्ष 1990 से आरंभ हुई मेरी यह 36 वर्षों की कार्यालयीन यात्रा आज विराम ले रही है। भिलाई स्टील प्लांट के विभिन्न आयामों भिलाई इंजीनियरिंग एंड डिज़ाइन ब्यूरो, पब्लिक रिलेशंस, L&A, भिलाई निवास, कोक ओवेन्स, T&D, कैंटीन सेल, मेडिकल एंड हेल्थ सर्विसेज, राजहरा माइंस, IR&CLC, Non-Works, स्पोर्ट्स, कल्चरल एवं सिविक एमेनिटीज़ से लेकर महाप्रबंधक (प्रभारी) के रूप में कार्य करने का अवसर मिलना मेरे लिए अत्यंत गौरव का विषय रहा।

इन सबका साथ मिलता गया
इस लंबी और समृद्ध यात्रा में मुझे अपने साथ कार्य कर चुके पूर्व अधिकारियों, पूर्व में सेवानिवृत्त हो चुके सम्मानित साथियों (जिन्होंने हर मोड़ पर मुझे गढ़ा और मार्ग दिखाया), वर्तमान में मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे ऊर्जावान अधिकारियों व कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन के मित्रों, विभिन्न एसोसिएशंस, जिला प्रशासन, मीडिया प्रतिनिधियों, ठेकेदारों और हमारे ठेका श्रमिकों का जो अपार स्नेह, सम्मान और विश्वास मिला, उसने हर कठिन परिस्थिति को सहज बना दिया।

जानिए रिटायरमेंट के अंतिम समय तक क्या-क्या मील के पत्थर पार किए
- नॉन-एग्जीक्यूटिव्स परफॉर्मेंस अप्रैजल (NPA) को नई दिशा में लागू करना।
- रिकॉर्ड समय में राष्ट्रीय स्तर की ‘हाफ मैराथन’ का सफल आयोजन।
- iGOT कर्मयोगी पर 100% सहभागिता सुनिश्चित करना।
- HR के क्षेत्र में प्रतिष्ठित ‘गोल्डन पीकॉक अवार्ड जीतना।
- रिकॉर्ड समय में राष्ट्रीय स्तर की ‘हाफ मैराथन’ का सफल आयोजन।
- जूनियर ऑफिसर्स परीक्षा का पारदर्शी संचालन।
- ‘दर्पण’ (DARPAN) कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन और कठिन IR परिस्थितियों में माइंस एवं भिलाई के बीच शानदार समन्वय हमारे टीमवर्क की मिसाल हैं।
- श्रम सुधारों और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कदम उठाए।
- नए लेबर कोड पर व्यापक प्रशिक्षण व कंप्लायंस, फैक्ट्री लाइसेंसिंग का समयबद्ध डॉक्यूमेंटेशन।
- ठेका श्रमिकों का युक्तियुक्तकरण (Rationalisation), RFID कार्ड्स।
- ऑनलाइन SDC व NDC, और ESCROW अकाउंट के जरिए भुगतान सुरक्षा की ठोस नींव रखी।
- ‘HRD सेशंस’ को नया स्वरूप देकर शीर्ष दिग्गजों से संवाद, ‘HR Bytes’ जैसे प्रकाशन की शुरुआत, अधिकारियों द्वारा ‘भविष्य-उन्मुखी दस्तावेज’ (Future-oriented Documents) और ‘प्रोफेशनल DAP’ तैयार करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हमने मिलकर पूरा किया।


