Bhilai Township: लैंड मोनेटाइजेशन स्कीम के सरलीकरण की सुगबुगाहट, टाउनशिपवासियों को राहत की उम्मीद
भिलाई टाउनशिप के रहवासी यही उम्मीद कर रहे हैं कि देश को इस्पात देने वाले कर्मचारियों का आशियाना सुरक्षित रहे और दशकों में बसा भिलाई टाउनशिप अपनी पहचान के साथ कायम रहे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई टाउनशिप के रहवासियों और पूर्व एवं वर्तमान इस्पात कर्मियों के लंबे संघर्ष के बीच लैंड मोनेटाइजेशन स्कीम
- भिलाई टाउनशिप के रहवासी यही उम्मीद कर रहे हैं कि देश को इस्पात देने वाले कर्मचारियों का आशियाना सुरक्षित रहे और दशकों में बसा भिलाई टाउनशिप अपनी पहचान के साथ कायम रहे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई टाउनशिप के रहवासियों और पूर्व एवं वर्तमान इस्पात कर्मियों के लंबे संघर्ष के बीच लैंड मोनेटाइजेशन स्कीम के सरलीकरण की सुगबुगाहट ने नई उम्मीद जगाई है। चर्चा है कि केंद्र सरकार स्तर पर भूमि मौद्रीकरण की नीति को सरल बनाने की कवायद चल रही है। इसी बीच सेल बोर्ड की हालिया बैठकों में लैंड मोनेटाइजेशन को लेकर चर्चा नहीं होने की बात भी सामने आ रही है। इसे भिलाई टाउनशिप के हजारों रहवासियों के लिए राहत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, भिलाई इस्पात संयंत्र की टाउनशिप को लैंड मोनेटाइजेशन की प्रक्रिया के दायरे में लाए जाने की आशंका के बीच करीब 500 पूर्व एवं वर्तमान कर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके साथ ही टाउनशिप में पिछले करीब आठ माह से विभिन्न संगठनों और रहवासियों की ओर से धरना-प्रदर्शन का दौर भी जारी है।
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बसा-बसाया शहर उजड़ने का जताया गया डर
पूर्व और वर्तमान कर्मियों का कहना है कि भिलाई टाउनशिप महज एक रिहायशी क्षेत्र नहीं है, बल्कि दशकों की मेहनत से विकसित एक सुव्यवस्थित शहर है। यहां आवासों के साथ अस्पताल, स्कूल, बाजार, खेल एवं सामाजिक सुविधाएं और मैत्री बाग जैसी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां मौजूद हैं।
कर्मियों ने आशंका जताई है कि यदि टाउनशिप की भूमि और सामाजिक परिसंपत्तियों का मौद्रीकरण कर उन्हें निजी हाथों में सौंपा गया तो इसका सीधा असर शहर की मौजूदा बसाहट पर पड़ेगा। उनका कहना है कि इससे केवल आवासीय क्षेत्र ही प्रभावित नहीं होगा, बल्कि भिलाई की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
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खाली जमीनों के मौद्रीकरण का दिया विकल्प
प्रधानमंत्री और नीति आयोग को भेजे गए पत्र में एक महत्वपूर्ण विकल्प भी सुझाया गया है। कर्मियों का कहना है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के पास टाउनशिप और प्रस्तावित विस्तार क्षेत्र के अलावा बड़ी मात्रा में गैर-आबादी एवं खाली जमीन उपलब्ध है। यदि अतिरिक्त भूमि का मौद्रीकरण करना आवश्यक है तो पहले ऐसी जमीनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
इससे एक ओर सरकार की भूमि मौद्रीकरण नीति का उद्देश्य पूरा हो सकता है, वहीं दूसरी ओर घनी आबादी वाले भिलाई टाउनशिप की बसाहट और आम नागरिकों के हित भी प्रभावित नहीं होंगे।
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‘फर्स्ट स्टेकहोल्डर्स’ को मिले मालिकाना हक
पत्र में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में टाउनशिप की जमीन का मौद्रीकरण करना ही पड़े तो दशकों से आवासों में रह रहे पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए। उनके अनुसार वर्तमान बाजार मूल्य या कलेक्टर गाइडलाइन के आधार पर संबंधित आवास के प्लॉट साइज की जमीन सीधे वहां रह रहे कर्मियों को बेचने का विकल्प अपनाया जा सकता है।
कर्मियों का तर्क है कि लंबे समय से टाउनशिप में रह रहे होने के कारण वे इस प्रक्रिया के ‘फर्स्ट स्टेकहोल्डर्स’ हैं और पहला अधिकार भी उन्हीं का होना चाहिए। इससे शहर की मौजूदा बसाहट को बचाने के साथ कर्मचारियों के आशियाने भी सुरक्षित रह सकते हैं।
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प्रधानमंत्री की बैठक के बाद नीति में बदलाव की चर्चा
इसी बीच सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि प्रधानमंत्री की सचिवों के साथ हुई बैठक में लैंड मोनेटाइजेशन नीति को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। इसके बाद से सेल बोर्ड की बैठकों में पिछले कुछ दिनों से लैंड मोनेटाइजेशन को लेकर कोई चर्चा नहीं होने की बात सामने आ रही है।
भिलाई टाउनशिप के रहवासियों के लिए यह घटनाक्रम राहत भरा माना जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नीति में क्या बदलाव होंगे और उसका भिलाई टाउनशिप पर सीधा प्रभाव क्या पड़ेगा।
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सितंबर से नोटिस का सिलसिला थमने की उम्मीद
इधर, टाउनशिप में लाइसेंस और रिटेंशन के आधार पर रह रहे लोगों के बीच एक और चर्चा तेज है। सूत्रों के अनुसार सितंबर माह से आगामी आदेश तक लाइसेंस एवं रिटेंशन धारियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया रोके जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन और सेल के बीच नया ड्राफ्ट तैयार होने तक इस संबंध में आगे की कार्रवाई रोकने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में सेल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक आदेश सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में रहवासियों की निगाहें अब अगले कदम पर टिकी हैं।
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आठ माह के आंदोलन का दिखेगा असर
भिलाई टाउनशिप को बचाने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और रहवासियों की ओर से लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है। अब लैंड मोनेटाइजेशन नीति के सरलीकरण की चर्चा और नोटिस प्रक्रिया थमने की संभावित खबर को आंदोलनकारियों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
लांकि अंतिम तस्वीर केंद्र सरकार, नीति आयोग, सेल और नेशनल लैंड मोनेटाइजेशन कॉरपोरेशन के बीच तैयार होने वाले नए ड्राफ्ट के बाद ही साफ होगी। फिलहाल भिलाई टाउनशिप के रहवासी यही उम्मीद कर रहे हैं कि देश को इस्पात देने वाले कर्मचारियों का आशियाना सुरक्षित रहे और दशकों में बसा भिलाई टाउनशिप अपनी पहचान के साथ कायम रहे।
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