भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर 10 अगस्त को पूरे बोकारो में संयुक्त "जेल भरो आंदोलन" आयोजित किया जाएगा। तैयारियां तेज।
- रविवार को सीटू और किसान सभा की संयुक्त बैठक सेक्टर 9 सीटू कार्यालय में हुई।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल बोकारो स्टील प्लांट के कर्मचारी जेल जाएंगे। दर्जनों कर्मचारी और ठेका मजदूर जेल जाने को तैयार हो गए हैं। केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ गुस्से में हैं। मज़दूर-किसान संयुक्त मंच के आह्वान पर “देश बचाओ-जनता बचाओ-संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ” के नारे के साथ 10 अगस्त को पूरे बोकारो में संयुक्त “जेल भरो आंदोलन” चलाया जाएगा।
रविवार को सीटू और किसान सभा की संयुक्त बैठक सेक्टर 9 सीटू कार्यालय में हुई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सीटू, बोकारो के जिला अध्यक्ष राज कुमार गोरांई ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर 10 अगस्त 2026 को पूरे बोकारो जिला में संयुक्त “जेल भरो आंदोलन” आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय मज़दूर–किसान सम्मेलन में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र फेडरेशनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा ने “देश बचाओ–जनता बचाओ–संविधान बचाओ–लोकतंत्र बचाओ” के आह्वान के साथ 10 अगस्त को देशव्यापी जेल भरो आंदोलन का निर्णय लिया था। बोकारो में यह कार्यक्रम उसी राष्ट्रीय निर्णय के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें पूरे जिले में हजारों मजदूर, किसान, खेत मजदूर, कर्मचारी, स्कीम वर्कर, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, छात्र, युवा, महिलाएं तथा अन्य मेहनतकश तबके भाग लेंगे।
ये खबर भी पढ़ें: SAIL BIG NEWS: प्रमोशन ऑर्डर आया नहीं, एक और CGM इंटरव्यू की तैयारी शुरू
उन्होंने कहा कि देश आज गहरे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक संकट से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की निजीकरण, ठेकेदारीकरण, व्यवसायीकरण और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों के कारण सार्वजनिक उपक्रमों, प्राकृतिक संसाधनों तथा जनकल्याणकारी क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
इससे रोजगार के अवसर घट रहे हैं, श्रमिक अधिकार कमजोर हो रहे हैं, किसानों और मेहनतकश जनता की आजीविका पर संकट गहरा रहा है तथा आर्थिक असमानता लगातार बढ़ रही है। संयुक्त मंच ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और साम्राज्यवादी दबावों के अनुरूप लागू की जा रही नीतियां देश की आर्थिक संप्रभुता, आत्मनिर्भरता तथा संविधान की समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावना के विपरीत हैं।
उन्होंने कहा कि चारों लेबर कोड श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर हमला हैं, जबकि किसानों से किए गए एमएसपी की कानूनी गारंटी, संपूर्ण कर्ज़माफी और भूमि अधिकार संबंधी वादे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, सरकारी रिक्त पदों को न भरना, पेपर लीक, मनरेगा को कमजोर करने के प्रयास, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की बदहाली तथा संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और संघीय ढांचे पर बढ़ते हमले जनता की चिंताओं को और गहरा रहे हैं।
संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त का जेल भरो आंदोलन केवल गिरफ्तारी देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, राष्ट्रीय संप्रभुता, सामाजिक न्याय और मेहनतकश जनता के अधिकारों की रक्षा का व्यापक संयुक्त जनसंघर्ष है।
आंदोलन के माध्यम से चारों लेबर कोड वापस लेने, बेलगाम निजीकरण पर रोक, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने, C2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी एमएसपी, किसानों की संपूर्ण कर्ज़माफी, मनरेगा को मजबूत करने, ग्रामीण एवं शहरी रोजगार की कानूनी गारंटी, समान काम के लिए समान वेतन, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा तथा सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने की मांग उठाई जाएगी।
नागरिकों से 10 अगस्त के संयुक्त “जेल भरो आंदोलन” में बड़ी संख्या में भाग लेकर इसे ऐतिहासिक सफलता प्रदान करने का आह्वान किया जाता है। बैठक की अध्यक्षता किसान नेता विश्वनाथ बनर्जी ने किया। बैठक में डीभीसी श्रमिक यूनियन के फूलचंद मांझी,बीसीकेयू दुग्धा के सतनारायण महतो,जलेस के कुमार सत्येन्द्र,बीएसएसआर युनियन के देवाशीष पाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। बैठक में दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
ये खबर भी पढ़ें: बोकारो स्टील प्लांट के सीजीएम संग 12 अधिकारी, 54 कर्मचारी रिटायर्ड

