विद्यासागर गिरी बोले: सरकारी संरक्षण और सुविधा प्राप्त कर श्रम अधिकार पर हमले में सरकार के साथ भागीदारी, भ्रम फैलाने में बीएमएस व्यस्त है।
- सेल आइएसपी में पहली बार 24 सितंबर को मतदान है।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के इस्को स्टील प्लांट में 24 सितंबर को मतदान है। 7 यूनियन चुनावी मैदान में है। मान्यता प्राप्त यूनियन का दर्जा या काउंसिल सदस्य बनने के लिए हर कोई ताल ठोक रहा है। एटक के केंद्रीय नेता और एनजेसीएस सदस्य विद्यासागर गिरी भी बर्नपुर में हैं। पहले पदाधिकारियों के साथ मंथन किया। कर्मचारियों के मुद्दों पर जमकर भड़ास फिर भड़ास निकाली। बीएमएस को सरकारी यूनियन करार दे दिया। बीएमएस के दावों की हवा ही निकाल दी। पढ़िए, डिटेल।
सूचनाजी.कॉम से विद्यासागर गिरी ने कहा-सब जानते हैं कि पहली बार सरकार और इस्पात मंत्रालय के अनुचित और गैर कानूनी हस्तक्षेप से हमारा समझौता फाइनल नही हो सका है। 39 महीने का एरियर रोक रखा गया है और इसे पचा जाने का षड्यंत्र चल रहा है। इसके प्राप्ति के लिए हम सभी अभी भी संघर्षरत हैं और 3 सितम्बर को दिल्ली में मुख्य श्रमायुक्त कार्यालय में प्रवंधन से वार्ता हुइ है। 10 वर्षों के लिए हुए समझौते की अवधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है, लेकिन सरकार और प्रबंधन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है।
सरकार की समर्थक और मजदूर आंदोलन को कमजोर करने के कामों में जुटी बीएमएस सरकारी पक्षधरता लिए प्रत्यक्ष-परोक्ष इस हमले का भागीदार बन रही है और दूसरे तरफ मजदूरों के बीच भ्रम भी फैलाती है। एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं करने की बात करते हैं, पर उसके वेतनमान पर हस्ताक्षर करते हैं। 39 माह का बकाया की मांग भी करते है और एमओयू में बनी कमिटियों में भागीदारी कर दोहरा चरित्र का बोध कराते हैं।
ऐसी स्थिति में जब सार्वजनिक और सरकारी क्षेत्र पर खुलेआम सरकारी हमले हो रहे हैं और सरकारी संरक्षण में भ्रष्टाचारियों की चलती है। निजी कंपनियों की सेल के कारखाने पर गिद्ध दृष्टि लगी है । ऐसी स्थिति में हम साथियों को अफवाह और भावनाओं से उपर उठकर अपने बुद्धि और विवेक का उपयोग करते हुए , वर्तमान की गंभीर चुनौतियों से अपनी और सार्वजनिक क्षेत्र की हिफाजत के लिए काम करनी चाहिए। चुनौतियों से निपटने के साथ भावी पीढ़ी और भविष्य के हित में सोंचते हुए वार्ताकारी यूनियन या परिषद के गठन के लिए सोंच समझकर मतदान करना चाहिए।
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सरकारी संरक्षण और सुविधा प्राप्त बीएमएस
विद्यासागर गिरी ने कहा-सेल जो कभी देश के सारे प्रतिष्ठानों में वेतन और सुविधाओं का नेतृत्व किया करता था वह 2014 के समझौता के बाद से,जब बीएमएस सरकारी दबाव से इसमें सम्मिलित हुई और अभी तक एक भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया, अपने उपस्थिति का दुरुपयोग करते हुए सरकार के मंत्रालय के अधिकारियों और प्रबंधन के फूट डालो और राज करो का मोहरा बना हुआ है। सरकारी संरक्षण और सुविधा प्राप्त कर उसी के सहारे श्रम अधिकार पर हमले में सरकार के साथ भागीदारी करने में, भ्रम फैलाने में व्यस्त हैं।
39 महीने का एरियर का भुगतान नहीं हो रहा
सेल ग्रीमेंट एवं एमओयू में स्पष्ट प्रावधान के बाद भी 39 महीने का एरियर का भुगतान नहीं किया जा रहा है। एग्रीमेंट में स्पष्ट होने के बाद भी स्थाई और उत्पादन तथा अनुरक्षण कार्यों में ठेका प्रथा चला रही है। ठेका मजदूर से उत्पादन और अनुरक्षण कराया जा रहा है और उनका भी अपार शोषण किया जा रहा है। स्थायी मजदूरों की शक्ति कमजोर कर समाप्त करने कोशिश की जा रही है । इस स्थिति में आवश्यक है कि हम अपनी ताकत को सामूहिकता में बदलें। अपने अधिकारों की रक्षा के हित में वार्ताकारी परिषद या वार्ताकारी यूनियन के प्रतिनिधित्व में एटक को स्थान दिलाने हेतु मतदान कर सहयोग करें।
बर्नपुर शहादत के बल पर टिका है
एनजेसीएस सदस्य ने कहा-हम दावे के साथ कह सकते हैं कि बर्नपुर जिसकी स्थापना 1918 में हुई थी, इसने शहादत देकर ट्रेड यूनियन और मजदूरों के अधिकार के प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया था। 6 मजदूरों ने अपनी शहादत 1953 के ऐतिहासिक आंदोलन में दिया था। आज बर्नपुर अगर सार्वजनिक क्षेत्र में है तो इसमें भी संगठित संघर्षों का योगदान है और ट्रेड यूनियनों की अहम भूमिका रही है। आज बर्नपुर सेल का आधुनिकतम प्लांट है और युवा मजदूर साथी, शिक्षित मजदूर साथी इसका संचालन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन बौद्धिक साथियों से उम्मीद है कि मतदान भावना में नहीं सोंच विचार कर करने के बाद ही करें।
श्रम कानून पर बीएमएस की पोल खोली
जिस तरह से अंग्रेजी राज से आजाद भारत में संघर्षों से अर्जित सारे श्रम कानून समाप्त कर सारे श्रम अधिकार करोना महामारी काल में छीन लिए गए, संसद में बिना बहस के कानून पास करा दिया गया, परंतु संघर्षों के कारण 5 वर्षों तक उसे लागू नहीं होने दिया गया। बिहार बंगाल जीत के बाद वह कानून लागू कर ट्रेड यूनियन विहीन, दलाल संस्कृति वाले, मजदूरों को गुलाम बनाने वाले श्रम संहिता थोपा गया है। पूरे देश का ट्रेड यूनियन विरोध में हड़ताल किया। लेकिन सरकारी……..बन चुका बीएएमएस विरोध और समर्थन दोनों बात कर अपने दोहरे चरित्र का प्रदर्शन कर रहा है। ऐसी स्थिति में आप लोगों को निर्णय करना है कि चुनाव में जो वार्ताकारी परिषद का चुनाव है, यानी बात करने वाली यूनियन का चुनाव है, उसमें किसी एक को एकाधिकार नहीं मिलनी चाहिए।
देश की पहली यूनियन एटक है…
केंद्रीय नेता ने कहा-देश का प्रथम यूनियन एआईटीयूसी, जो 1953 में बर्नपुर के ऐतिहासिक एक्शन कमेटी के संघर्ष में 6 मजदूरों की शहादत का इतिहास समेटे हुए है। ईमानदारी, सादगी तथा उत्कृष्ट नेतृत्व का इतिहास समेटे हुए कार्य करने की विरासत वाले एक्शन कमेटी मे संयुक्त रूप से सबों का साथ लेकर चलने वाली एटक यूनियन है। इस चुनाव मे एटक का चुनाव चिन्ह महिला पुरुष मजदूर के हाथ में एटक का झंडा वाले चिन्ह पर मोहर लगाकर मतदान करें। वार्ताकारी परिषद गठन में संघर्ष का प्रतीक एटक का प्रतिनिधित्व रखने के लिए मतदान करें।
आप भी जानिए किन मुदों पर मांग रहे समर्थन
सामूहिक वार्ताकारी परिषद निर्मित कर किसी एक का एकाधिकार नहीं बनने दें। चुनौतियां कठिन और गंभीर है, हमले घनघोर है, सत्ता और प्रवंधन का सह मेल से हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में अपने अधिकार की हिफाजत और भविष्य की उपलब्धियां के लिए मजबूत ट्रेड यूनियन और मजदूरों की एकता ही समय की जरूरी मांग है।
एटक निवेदन करता है कि देश में श्रम कानून, ट्रेड यूनियन अधिकारों की हिफाजत, इस्पात मजदूरों के समझौते के अनुसार 39 माह का बकाया का भुगतान सहित ग्रेच्युटी की बिना उपरी सीमा का भुगतान और डिप्लोमा इंजीनियर भाइयों के युवा पीढ़ी के बेहतर प्रोन्नति एवेन्यू, पदनाम और सम्मानजनक विकास क्रम को सुनिश्चित करने के लिए, आइटीआइ का प्रवेश वेतनमान एस 3 एव डिप्लोमा का एस 6 जो समझौता एवं सेवा शर्तों के विरुद्ध मनमानी परिवर्तन किया गया है।
उसके विरुद्ध एवं लंबित मुद्दे सहित ठेका श्रमिकों का वेतन, मान काम की समान मजदूरी एवं सेवा सुरक्षा के लिए एकजुट होकर आगे आएं। युवा नेतृत्व विकसित कर ट्रेड यूनियन अधिकार, कानून की समझ के साथ मजदूर एकता और संधर्षो के बल पर अधिकारों की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़े। हमें दया और कृपा नहीं अधिकार लेना है। एआईटीयूसी के चुनाव चिन्ह पर,जो मतदान पत्र के क्रमांक 7 यानी सबसे नीचे वाले पंक्ति पर अंकित है, उसी चिन्ह पर मत देने की अपील एनजेसीएस सदस्य ने की है।




