डिसिप्लिन बाई हार्ट होना चाहिए बाई फोर्स नहीं। सीटू ने पूछा यदि 80% दुर्घटनाएं मानवीय भूल से होती हैं तो PPE न देना किसकी भूल है?
- सीटू बोला-यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं जब इस्पात भवन के सामने भी ठेले दिखाई देने लगेंगे।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेफ्टी डिपार्टमेंट की ढिलाई पर सीटू ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं। एक डीएसओ का कहना है कि 80 प्रतिशत दुर्घटनाएं मानवीय भूल/चूक के कारण होती हैं और 20 प्रतिशत दुर्घटनाएं मशीनरी की खराबी अथवा अन्य कारणों से होती हैं। इसी आधार पर मानवीय भूल के लिए आर्थिक दंड एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है और इसकी जानकारी सभी कर्मचारियों को होना चाहिए। सीटू का सवाल है कि जब सुरक्षा की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर तय की जा रही है, तो उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी? बिना हेलमेट, ईयर प्लग और अन्य आवश्यक PPE के काम करवाना किस श्रेणी की भूल मानी जाएगी?
24 अगस्त को सीटू ने बताया, फिर भी PPE नहीं मिला-जवाबदेह कौन
सीटू ने 24 अगस्त को मुख्य महाप्रबंधक, सुरक्षा अभियांत्रिकी के समक्ष पत्र देकर स्पष्ट रूप से बताया था कि कई कार्मिक विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक PPE किट उपलब्ध नहीं कराई गई है। सीटू ने विशेष रूप से सेफ्टी हेलमेट, ईयर प्लग आदि उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बावजूद यदि अब तक PPE उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी? सीटू ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रबंधन को सूचना दे दी है; अब कार्रवाई करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
बोरिया गेट के बाहर ठेले लग रहे हैं, किन्तु सुरक्षा सिर्फ फोटो खिंचाने तक सीमित
बोरिया गेट से बाहर निकलने वाले रास्ते में गेट से लगभग 10 मीटर की दूरी पर फल बेचने वालों ने ठेले लगाना शुरू कर दिया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वह दिन दूर नहीं जब इस्पात भवन के सामने भी ठेले दिखाई देने लगेंगे। सवाल यह है कि क्या यही प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था है? शिफ्ट की शुरुआत में सुरक्षा के बातों को बताते हुए अथवा सुरक्षा संबंधी बैठकों में फोटो खिंचाना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा का मतलब संभावित खतरे को दुर्घटना होने से पहले रोकना है।
मवेशियों के झुंड बेखौफ और नगर सेवाएं विभाग बेपरवाह
संयंत्र परिसर के अंदर तथा कर्मचारियों के ड्यूटी आने-जाने वाले रास्तों पर मवेशियों के झुंड बेधड़क बैठे रहते हैं। नगर सेवाएं विभाग के नियंत्रण में होने के बावजूद इस गंभीर खतरे पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। कर्मचारियों के आवागमन के मार्ग पर मवेशियों की मौजूदगी आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं जो कालांतर में बड़ी एवं गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। जीरो टॉलरेंस का नियम क्या केवल कर्मचारियों की गलती खोजने के लिए है, या सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों पर भी लागू होगा?
काम का बोझ बढ़ता रहा, ठेका श्रमिक दो-दो शिफ्ट करते रहे-फिर जीरो टॉलरेंस कहां है
एक तरफ कर्मचारियों की संख्या लगातार कम हो रही है, दूसरी तरफ बचे हुए कर्मियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। ठेका श्रमिकों से एक के बाद एक दो-दो शिफ्ट काम कराने की स्थिति भी बनी हुई है। थकान, अत्यधिक कार्यभार और अपर्याप्त मानवबल भी दुर्घटनाओं के बड़े कारण बन सकते हैं। सीटू पूछना चाहता है कि क्या जीरो टॉलरेंस का मतलब केवल कर्मचारी की छोटी-सी चूक पर कार्रवाई करना है, या कम मानवबल, अत्यधिक कार्यभार, PPE की कमी, असुरक्षित रास्ते और मवेशियों जैसे वास्तविक सुरक्षा जोखिमों पर भी उतनी ही कठोरता लागू होगी?
ये है सीटू की मांग
सुरक्षा व्यवस्था को दंडात्मक नहीं बल्कि जवाबदेह और व्यावहारिक बनाया जाए।
सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को समय पर आवश्यक PPE उपलब्ध कराया जाए।
बोरिया गेट सहित सभी आवागमन मार्गों से अतिक्रमण/ठेले हटाए जाएं।
मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
अत्यधिक कार्यभार और लगातार दो-दो शिफ्ट कराने की व्यवस्था पर तत्काल रोक लगाई जाए।
जीरो टॉलरेंस हो तो सबसे पहले सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और व्यवस्था की खामियों पर लागू किया जाए।

